तकनिकी अपग्रेड होता भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड

तकनिकी अपग्रेड होता भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड

कुलदीप सिंह राणा/देहरादून। समय के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं शिक्षा से सम्बंधित भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड अपडेट होता जा रहा हैं। राज्य निर्माण के बाद से नैपथ्य में रहा आयुष का यह विभाग अब तक मात्र आयुर्वेदिक डॉक्टर्स व अन्य पेशेवर के रजिस्ट्रेशन एवं आयुष पैरामेडिकल के कोर्स के संचालन तक ही सिमिटा था लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुये भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड अब तकनिकी रूप से खुद अपग्रेड कर रहा हैं। इसी दिशा में भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड अब डिजिटल हो गया हैं विगत दिनों आयुष सचिव डॉ पंकज पाण्डेय ने परिषद की वेबसाइट और रजिस्ट्रेशन पोर्टल का लोकार्पण किया। इसी के साथ ही गत वर्ष परिषद में बड़े सुधार किये गये हैं। परिषद ने आयुष पैरामेडिकल कोर्स के पाठ्यक्रम के साथ साथ परीक्षा पैटर्न में भी नया बदलाव किया हैं पाठ्यक्रम में अब रोजमर्रा की जीवन शैली में आयुर्वेद के उपयोग को शामिल किया गया। साथ ही अब आयुष फार्मेसी, नर्सिंग, पंचकर्म, योग, एवं प्राकृतिक चिकित्सा से सम्बंधित परीक्षाओं में नया पैटर्न लागू करने का कार्य किया हैं। जिससे आयुर्वेद से जुड़े विद्यार्थियों को परिषद की परीक्षाओं के वर्षों पुरानी प्रक्रिया से निजात मिला हैं। परिषद ने सरकारी व मान्यता प्राप्त निजि पैरामेडिकल संस्थानों में आयुष से सम्बंधित लघु कोर्स भी प्रारम्भ किये हैं जिनमे आयुर्वेदिक आहार एवं पोषण, आयुष ब्यूटी केयर, व मर्म थेरेपी से सम्बन्धित कोर्स सम्मलित हैं इनके लिये नई पुस्तकों को भी लागू किया गया हैं यह कोर्स रोजगार सृजन में बेहद लाभकारी साबित हो सकते हैं।

आयुष चिकित्सा प्रणालियां चिकित्सा दर्शन पर आधारित मानी गयी हैं आयुर्वेद बिमारियों को रोकने के साथ साथ स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर आधारित वह अवधाराणा हैं जो स्वस्थ जीवन की नित्यचर्या का प्रतिनिधित्व करता हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग अब वैश्विक स्वास्थ्य का प्रतीक बन गया हैं भारतीय समाज में आयुर्वेद के रूप में प्रचलित वेदों से प्राप्त चिकित्सा ज्ञान की एक बहुत समृद्ध विरासत उपलब्ध है जो सदियों से देश की एक प्रमुख चिकित्सा पद्धति रही हैं।

आयुष सचिव डॉ पंकज पाण्डेय का मानना हैं कि उत्तराखंड में आयुर्वेद के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।
लेकिन हम अभी भी दक्षिण के राज्यों से पीछे हैं वेलनेस सेंटर्स को राज्य सरकार लगातार बढ़ावा दे रहीं हैं। जिससे प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में पारंगत युवाओं के लिये अवसर ही अवसर हैं

वर्तमान समय में देश दुनिया में आयुष चिकित्सा से जुड़े पेशेवारों की मांग बढ़ी हैं। भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड गुणवत्ता पूर्ण विशेषज्ञ तैयार करने कि दिशा में आगे बढ़ रहा हैं नये पाठ्यक्रम के अनुरूप परिषद से जुड़े शिक्षण संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता के सुधार पर जोर दिया जा रहा हैं। रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ हुये परिषद के करार के बाद से अब आयुष पैरामेडिकल कालेजों में अध्यन्नरत प्रशिक्षु छात्रों को अब प्राथमिक चिकित्सा का भी प्रशिक्षण दिया जाने लगा हैं। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुये प्राथमिक चिकित्सा शिक्षा की आवश्यकता बेहद महसूस होती हैं। इससे प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को काफ़ी विस्तार मिल सकेगा।

अपर सचिव आयुष विजय जोगदडे का कहना हैं कि भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड की वेबसाइट आयुष के प्रचार प्रसार की दिशा में बेहद मदद मिलेगी पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन के कार्य सुगम होंगे और उनमे पारदर्शिता आयेगी।
वर्तमान में प्रदेश में 26 पैरामेडिकल संस्थान हैं।
वही परिषद में 1500 से अधिक पंचकर्म सहायक व लगभग 150 योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहायक रजिस्टर्ड हैं बीएएमएस डॉक्टर्स आयुष फार्मेशिष्ट, आयुष नर्सिंग, पंचकर्म प्रशिक्षित व अन्य सहित कुल 10 हजार पंजीकरण वर्तमान में परिषद में पंजीकृत हैं।

” उत्तराखंड योग एवं आयुर्वेद की भूमि हैं आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग सयुंक्त राष्ट्र संघ से लेकर विश्व के अनेक देशों तक अपनी पहुँच बना चुका हैं। दुनिया योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की तरफ जा रही हैं भारतीय चिकित्सा परिषद ने भी भविष्य की मांग एवं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुये पाठ्यक्रम में बदलाव कर उन्हें अपडेट करने का कार्य किया हैं। वही परिषद अब डिजिटल हो गया हैं। वेबसाइट एवं रजिस्ट्रेशन पोर्टल से परिषद में पारदर्शिता स्थापित होंगी जिसका लाभ अभ्यार्थियों के साथ साथ जनता को भी मिलेगा। हम मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के मार्गदर्शन में परिषद को शिक्षण प्रशिक्षण के साथ साथ रोजगार के क्षेत्र में भी आगे ले जाने हेतु प्रयासरत हैं। “

– नर्वदा गुसाईं, रजिस्ट्रार

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