मामचन्द शाह/देहरादून। सात मई 2024 को देहरादून के सहस्त्रधारा रोड की ओर जाना हुआ तो पाया कि इस सड़क पर पिछले साल तक की गर्मियों में जो बड़े-बड़े पेड़ लोगों को छांव प्रदान किया करते थे, वे सब विकास की भेंट चढ़ गए। सड़क का चौड़ीकरण हो गया, बीच में डिवाइडर बन गए और वाहन फरटि भर रहे हैं। इस सबके बीच लोग चिलचिलाती गर्मी में छांव ढूंढते दिखाई दे रहे थे। ऐसे में तपिशभरी गर्मी में हलक सूखने पर लोगों को अनायास ही उन हरे पेड़ों की यादें ताजी हो रही हैं, जो कभी उन्हें दो पल सुस्ताने के लिए ठंडक व सुकून दिया करते थे, किंतु यह अब बीते जमाने की बात हो गई है।
विकास के नाम पर केवल इसी सड़क के हरे पेड़ों पर आरी नहीं चली, बल्कि लगभग ऐसी स्थिति सभी सड़कों की है। यह तो अभी शुरुआतभर है, विकास के खातिर इस तरह की समस्याओं से जूझने के लिए दूनवासियों को अब तैयार हो जाना चाहिए।
आपने उत्तराखंड के कई पहाड़ी क्षेत्रों में गर्मियों के दिनों में पेयजल संकट से जूझने की खबरें अवश्य सुनी होंगी। हालांकि केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘हर घर नल- हर घर जल’ के बाद अब धीरे-धीरे
समस्या का समधान भी होने लगा है, किंतु अभी इसमें कुछ और वक्त लगेगा। आपको सुनकर ताज्जुब होगा कि इस बार देहरादून की कई कालोनियों में पेयजल संकट से हाहाकार मचा हुआ है। अब आप सोचेंगे कि जब “सब्बि धाणि देरादूण” है तो आखिर यहां का पानी कौन पी गया! इसको समझने की जरूरत है।
कांग्रेस नेता धस्माना बताते हैं कि अस्थायी राजधानी देहरादून में पिछले 24 वर्षों में आबादी का घनत्व पांच गुणा बढ़ गया है और इसी अनुपात में रिहायशी इलाके भी बढ़े हैं, लेकिन पीने के पानी के स्त्रोत वही पुराने हैं और उनमें कोई वृद्धि नहीं हुई। हां हरे पेड़ों को काटकर यहां कंक्रीट के जंगल जरूर खड़े हो गए हैं। यही कारण है कि आज देहरादून के अधिकांश इलाके गर्मी शुरू होते ही पानी के लिए तरस रहे हैं।
इस संबंध में जिलाधिकारी सोनिका ने जल संस्थान एवं पेयजल निगम के अधिकारियों को पेयजल समस्याओं का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। पेयजल समस्या के निराकरण व पानी की बर्बादी से संबंधी शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 18001802525/18001804109 जारी किया गया गया।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक का घेराव

देहरादून में गहराते पेयजल संकट के खिलाफ गुस्साए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में जल संस्थान के नेहरू कालोनी स्थित मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय पर प्रदर्शन किया और महानगर में व्याप्त पेयजल संकट का शीघ्र समाधान करने की मांग की। इस दौरान उन्होंने खाली घड़े के साथ ज्ञापन सौंपा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतर आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
यहां बना हुआ है जल संकट
राजपुर डाक पट्टी, कैनाल रोड, किशन नगर, जाखण, आर्यनगर, डीएल रोड, करणपुर, भगत सिंह कालोनी, रक्षा पुरम, डालनवाला, बंजारावाला, कांवली, द्रोणपुरी, संगम विहार, न्यू पतेलनगर, शास्त्रीनगर, कालिंदी एनक्लेव, खुड़बड़ा, बल्लूपुर, कालिदास रोड, हाथीबड़कला, ब्रह्मपुरी और ब्राह्मणवाला।
कुल मिलाकर जिला प्रशासन की टीमें कछुआचाल से ही सही पर समस्या का हल ढूंढने में जोर-शोर से जुटी हुई हैं, किंतु पीक सीजन में सीमित संसाधनों के बीच पेयजल जैसे संकट से उबरना आसान काम नहीं!
बहरहाल, देहरादून में पीने के पानी के लिए सूखते हलक भविष्य की भयावहता को बयां कर रहे हैं। ऐसे में समय रहते इसके निराकरण की राह खोजनी आवश्यक प्रतीत होती है। पेड़ों के संरक्षण को लेकर भी व्यापक मंथन की जरूरत है। यदि धरातल पर शीघ्र इस दिशा में सकारात्मक प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में इन सूखते हलक के लिए जिम्मेदार कौन होगा, यह आप स्वयं ही तय कर लीजिए!
“युद्ध स्तर पर शहर की पेयजल समस्या के समाधान को लेकर काम किया जा रहा है और जिन इलाकों में पेयजल आपूर्ति की कमी होगी, वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जाएगा।”
नीलिमा गर्ग, मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान, उत्तराखंड

