डा० राजेंद्र कुकसाल/देहरादून।
कलासन नर्सरी फार्म द्वारा जनपद पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण विकास खंड के चोपड़ा (नौगांव) खिसूं पैठाणी मोटर मार्ग पर स्थापित सेबाग फार्म सेब बागवानों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उत्तर पूर्वी ढाल, 1738 मीटर की ऊंचाई, सिंचाई हेतु पानी की उपलब्धता, पर्याप्त सूर्य का प्रकाश एवं जंगल से घिरे सेब के लिए अनुकूल जलवायु वाले इस बगीचे की स्थापना वर्ष 2023 में दो बर्ष पुराने सेब के पौधों के उच्च घनत्व में रोपण से हुई, जिस पर एक बर्ष बाद ही याने 2024 में ही फल लगने शुरू हो गये है। सेब के इस बगीचे में अनुवांशिक एवं भौतिक रूप से विशुद्ध एम 9 रूट स्टॉक्स पर उच्च घनत्व में चार हजार सेब के पौधे लगाए गये है, जिनका रखरखाव उच्च स्तर का है।
इस बाग में सेब के पौधों के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम का निर्माण किया गया है, उचित स्वचालित ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई गई है, फर्टीगेशन सिस्टम लगाया गया है। बगीचा के चारों ओर सोलर फैसिंग लगी है। सड़क के पास होने के कारण आने जाने वाले लोग रुक कर सेब के इस बाग को देख रहे हैं व प्रेरित हो रहे हैं।
सेब में उच्च घनत्व की आधुनिक खेती
आधुनिक सेब की खेती को उच्च घनत्व वाली खेती भी कहा जाता है। पारंपरिक बगीचे की तुलना में इसमें प्रति इकाई पेड़ों की संख्या अधिक होती है, जिससे उत्पादन प्रति इकाई आठ से दस गुना तक बढ़ाया जा सकता है।
पौधों की दूरी के आधार पर सेब रोपण की प्रणालियां (Planting Systems)-
1. पारंपरिक विधि बीजू पौधों पर (Seedlings) पर तैयार सेब के पौधे आकार में बड़े होते हैं, किस्मों के आधार पर लाइन से लाइन की दूरी एवं लाइन में पौध से पौध की दूरी 20×20 फीट (110 पौधे एकड) से 12×12 फीट (310 पौध/एकड़, स्पर किस्में) तक होती है।
2. कम घनत्व रूटस्टॉक्स का आम तौर पर MI 793, MM 111 क्लोनल उपयोग कम घनत्व वाले पौध रोपण के लिए किया जाता है। यह भी किस्मों पर निर्भर करता है। कम घनत्व वाले पौध रोपण 14×8 (गैर स्पर के लिए 395/ एकड़) से 12×7 (स्पर प्रकार के लिए 527/ एकड़) किस्मों के लिए किया जाता है।
3. मध्यम घनत्व इस विधि में पौध रोपण के लिए MI, MM 106, M 116 क्लोनल रूटस्टॉक्स का अधिकतर उपयोग किया जाता है। घनत्व 12×6 और 11×5 फीट है। कुल पौध रोपण 615 और 895 पेड/एकड़ होता है।
4. उच्च घनत्व इस प्रणाली में M9, M 26 के रूट स्टॉक्स उपयोग किए जाते हैं, 10×3 और 8×2.25 फीट आदर्श दूरी हैं। घनत्व 1470 और 2460 पेड़ प्रति एकड़ है, इस प्रणाली में पौधों को सहारा देने हेतु एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम के निर्माण की आवश्यकता होती है।
5. अल्ट्रा हाई डेसिटी पेड़ों की छतरी को रूटस्टॉक्स M 9, M 26 पर नियंत्रित किया जाता है। उपयोग की गई दूरी 8×2.1 फीट (2635) पेड/एकड़) और 7×1.7 (3720 पेड/एकड़) है। इस प्रणाली में एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम निर्माण की आवश्यकता होती है।
कलासन नर्सरी फार्म जिनके द्वारा इस बगीचे की स्थापना की गई है इस फर्म के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रम सिंह रावत मूल रूप से पौड़ी जनपद के पांवों विकासखंड के सीकू कलूण गांव के निवासी हैं। इनकी जन्मभूमि व कर्मभूमि हिमाचल प्रदेश रही है।
हिमाचल में आपकी सेब की हाइटेक नर्सरी कलासन नाम से है, जो आज उच्च घनत्व में सेब की फार्मिंग के साथ-साथ उच्च स्तरीय ट्रेनिंग और कंसल्टेंसी सेंटर बन चुका है। उत्तराखण्ड में अपने मूल (पैतृक स्थान) में 2018 से आपने सेब की नर्सरी पर कार्य प्रारंभ किया। अब तक कलासन नर्सरी द्वारा राज्य में 80 से अधिक सरकारी व व्यक्तिगत सेब के बाग स्थापित किए गए हैं। पौड़ी जनपद के धूमाकोट में वर्षों से बंजर पड़े उद्यान विभाग के पटेलिया फार्म को वर्ष 2018 में तत्कालीन जिलाधिकारी पौड़ी धीराज गर्बयाल के सहयोग से आपकी टीम द्वारा विकसित किया गया। पटेलिया फार्म में वर्तमान में उच्च घनत्व में सेब का बाग के साथ ही रूट स्टॉक्स नर्सरी तैयार की जा रही है। पर्यटकों को भी यह केन्द्र आकर्षित कर रहा है। माडल के तौर पर जिलाधिकारी पौड़ी के आवासीय परिसर में भी आपकी टीम द्वारा उच्च घनत्व का सेब का बगीचा विकसित किया है।
श्री रावत का कहना है कि उत्तराखंड में सेब की फसल हिमाचल से पहले तैयार होती है, जिसे बाजार में दाम भी अच्छा मिलेगा। एक एकड़ यानी बीस नाली जमीन पर उच्च घनत्व प्रणाली में लगभग 1300 पौधे सेब के लगाए जा सकते हैं। पांचवे साल से सारे खर्चे निकालकर 20 नाली सेब के बगीचे से आसानी से सब खर्चे निकालकर छह लाख रुपए सालाना तक आराम से कमाए जा सकते हैं।
पहाड़ में एक साथ खेत नहीं हैं तो बागवानी के लिए कंपनी या कोओपरेटिव बनायी जा सकती है। सामूहिक खेती करने पर जंगली जानवरों और बंदरों से भी आसानी से फसल को बचाया जा सकता है। सलाह अनुकूल जलवायु, ऊंचाई, ढलान, भूमि व सूक्ष्म वातावरण होने पर ही सेब के बाग लगायें। एम 9 रूट स्टॉक्स पर उच्च घनत्व की सेब की खेती केवल उन बागवानों के लिए फायदेमंद है, जिनके पास सभी साधन (मजबूत सपोर्ट सिस्टम निर्माण, उचित ड्रिप सिंचाई प्रणाली, फर्टीगेशन सिस्टम लगाने की क्षमता) अपना समय व सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध हो। उत्तराखण्ड में बागवानों के लिए कम घनत्व एम आई 793 व एम एम 111 अथवा मध्यम घनत्व एम 7, एम 116, एमएम 106 रूट स्टॉक्स पर सेब की बागवानी अधिक लाभदायक हो सकती हैं।

