रुद्रप्रयाग। काँग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने केदारनाथ आपदा को लेकर प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन को आडे हाथ लिया। गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाऊस में पत्रकार वार्ता में उन्होने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता पर आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है। जिसमें प्रदेश सरकार नाकाम रही 2013 की आपदा के बाद भी सरकार ने सबक नहीं लिया जिसका नतीजा फिर केदार नाथ यात्रा मार्ग में देखने को मिला।
सरकार व जिला प्रशासन को आडे हाथ लेते हुए उन्होने कहा कि आपदा के तीन दिन बाद भी कोई स्पष्ट जानकारी साझा करने को तैयार नहीं है। जबकि कई स्थानीय लोगों व यात्रियों का परिजनों से संपर्क नहीं हो पाया। उन्होने इस जल प्रलय में भारी जानमाल की आशंका जतायी है।
पूर्व कैविनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने आपदा को लेकर सरकार को कठगरे में खडा करते हुये कहा कि उत्तराखंड मे आपदाओं की संवेदनशीलता को देखते हुये उनके आपदा प्रबंधन मंत्री रहते हुये जिला स्तर पर आपदा प्रबधन केन्द्र की स्थापना की गयी थी। लेकिन आज तक सरकार उसके ढांचे में कोई सुधार नहीं कर पाई। उन्होने कहा की आपदा की दृष्टि से संवेदनशील जिलों में प्रशिक्षित व दक्ष आपदा राहत दलों की तैनाती की जानी आवश्यक है।
उन्होने कहा कि स्थानीय लोगों से मिलकर पता चला की उनके परिजन चार दिनो से लापता है उनकी कोई जानकारी नही मिल पा रही है लेकिन अभी तक लापता लोगों व मवेशियों की हानि की कोई जानकारी स्पष्ट नहीं की जा रही है। उन्होने कहा कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील जनपद रुद्रप्रयाग मे विशेष प्रशिक्षित टीम तैनात की जानी अति आवश्यक है क्योंकि यहाँ केदार धाम में लाखों की संख्या मे लोग आते है इसको देखते हुए जनपद में ऐसे अधिकारियों की तैनाती की जानी चाहिये जो पर्वतीय क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थियों से अवगत हो, ओर जो पहाड की चुनौतियों का सामना कर सके।
उन्होने जिला प्रशासन पर आपदा की स्थिति स्पष्ट न करने का आरोप लगाया ओर कहा कि जिला प्रशासन को आपदा पर पत्रकारों से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। केदार नाथ मंदिर मे सोना गायब होने व दिल्ली में केदा धाम से मंदिर निर्माण पर उन्होने कहा कि केदार बाबा के साथ ठगी करोगे तो त्रासदी होगी उन्होने कहा कि सरकार के पापो का खामियाजा उत्तराखंड वासियों को भुगतना पड रहा है।


