भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी धामी सरकार, बड़े घोटालों पर मौन क्यों? : दसौनी

भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी धामी सरकार, बड़े घोटालों पर मौन क्यों? : दसौनी

देहरादून। बीते रोज़ उत्तराखंड के धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के लिए सम्मानित किया गया, जो की उत्तराखंड की मौजूदा परिस्थितियों में आंख में धूल झोंकने जैसा है यह कहना है उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी का।

गरिमा ने कहा कि प्रदेश के मुखिया को भी ऐसे चाटुकारिता के कार्यक्रमों से बचना चाहिए जैसा की मूरधन्य लोगों ने कहा भी है” निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाए”दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार ने अब संस्थागत रूप ले लिया है,। एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार की चुप्पी और ढिलाई से यह स्पष्ट हो गया है कि इन भ्रष्टाचारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

1. उद्यान विभाग घोटाला
हज़ारों करोड़ रुपये के विभिन्न परियोजनाओं में गड़बड़ी, नकली बिल, बिना कार्य के भुगतान, और टेंडर प्रक्रिया में धांधली उजागर हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों से लेकर मंत्री स्तर तक मिलीभगत के आरोप हैं परंतु अब तक किसी मंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं।
2. सैन्यधाम घोटाला जिसकी जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
3. आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी
भाजपा के मंत्री जोकि असामान्य संपत्ति के मालिक बन चुके हैं। इनके खिलाफ जांच की कोई पहल नहीं की गई।
गरिमा ने कहा कि भाजपा की ईमानदारी का दावा खोखला साबित हो चुका है।
4. पेपर लीक और भर्ती घोटाले
दसौनी ने कहा कि UKSSSC, JE-AE भर्ती, पटवारी भर्ती सहित कई परीक्षाएं लीक हुईं। बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खेला गया। कुछ बिचौलियों की गिरफ्तारी के बाद मामला दबा दिया गया। बड़े मगरमच्छों के गिरेबान तक मामला पहुंचने ही नहीं दिया गया।
5. खनन, शराब और भू माफिया को संरक्षण
भाजपा शासन में खनन माफिया पूरी तरह बेलगाम हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध खनन और मैदानी क्षेत्रों में शराब ठेकों में बड़े घोटाले हो रहे हैं। प्रदेश में बहुत आयात में बाहरी लोगों के बड़े-बड़े रिसोर्ट व होटल देखे जा सकते हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही उल्टा बुलडोजर गरीब लोगों पर चलाए जा रहा है।
जिसमें सफेद पोशाें के करीबी लोग संलिप्त बताए जा रहे हैं लेकिन कोई जांच नहीं?
6. स्थानांतरण उद्योग और ठेका घोटाले
शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, सिंचाई, PWD जैसे विभागों में पोस्टिंग व ठेकों की खुली बोली चल रही है। ईमानदार अधिकारियों का ट्रांसफर, भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
7. हरिद्वार जमीन घोटाला (₹54 करोड़) हरिद्वार नगर निगम ने ग्राम सराय की कृषि भूमि (लगभग 2.3 हेक्टेयर) को ₹54 करोड़ में खरीदा—जबकि उसका मूल्य ₹15 करोड़ था। अनुचित प्रक्रिया में स्वीकृति दी गई और दस्तावेजों में मिलीभगत की गई ।
8.नैनिताल में रिश्वत,नैनिताल के ट्रेज़री मुख्य कोषाधिकारी और एकाउंटेंट कोषागार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए
9. देहरादून में चौकी प्रभारी की गिरफ्तारी
देहरादून में एक चौकी प्रभारी ₹1 लाख की रंगे हाथों रिश्वत करते हुए पकड़े गए
10. PWD इंजीनियरों द्वारा चमोली जिले में बनी बैली पुल में गंभीर निर्माण दोष पकड़ा गया।
11.टेक्निकल यूनिवर्सिटी में हो रहे घोटाले और कुलपति पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, परंतु कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
12. उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में भी भर्ती घोटाले सामने आ रहे हैं।

गरिमा ने कहा कि राज्य में महिला अपराध में हो रही बढ़ोतरी और उसमें सत्ता रूढ़ दल के लोगों की संलिप्तता भी भ्रष्टाचार की श्रेणी में ही माना जाएगा।

गरिमा ने कहा कि भ्रष्टाचार पर भाजपा का “शून्य सहिष्णुता”(ज़ीरो टॉलरेंस)का दावा एक राजनीतिक मज़ाक बन चुका है। राज्य में विभागों में धड़ल्ले से कमीशन खोरी हो रही है यह भाजपा के ही पूर्व मुख्यमंत्री कई मौके पर कह चुके हैं उत्तराखंड की जनता अब सब जानती है और आगामी समय में हर घोटाले का जवाब देगी।

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