देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। देहरादून सहित कई जिलों में क्लाउडबर्स्ट और भूस्खलन से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 अन्य लापता बताए जा रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 20 सितंबर तक रेड अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसी बीच 21 सितंबर को निर्धारित उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (ग्रुप सी) परीक्षा को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है। सैकड़ों अभ्यर्थी परीक्षा स्थगित करने की मांग कर रहे हैं।
संस्थापक संयोजक मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति और महासचिव उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा, मोहित डिमरी ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आयोग क्या युवाओं की जान का दुश्मन बनना चाहता है? पूरे प्रदेश में तबाही मची है, पुल टूट चुके हैं, सड़कें बह गई हैं, और पुलिस घरों से बाहर न निकलने की सलाह दे रही है। फिर 21 तारीख को परीक्षा कैसे हो सकती है? अगर अभ्यर्थी 19-20 को सफर करेंगे, तो अलर्ट के बीच उनकी जान जोखिम में पड़ जाएगी। पूरी मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
आयोग अध्यक्ष GS मर्तोलिया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। कम से कम 20 दिनों का समय दिया जाए।” डिमरी ने सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के माध्यम से अपनी बात रखी, जिसमें उन्होंने युवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, देहरादून में ही 13 लोगों की मौत हुई है, जबकि थराली, धराली, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे क्षेत्रों में भारी तबाही हुई है। सहस्त्रधारा, मालदेवता और तमसा नदी के उफान पर आने से सैकड़ों घर-दुकानें जलमग्न हो गईं, और 900 से अधिक लोग फंस गए। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं, लेकिन मौसम की मार के कारण राहत कार्य बाधित हो रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की, लेकिन परीक्षा स्थगित करने पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
UKSSSC की इस परीक्षा से पटवारी, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) समेत 416 पदों पर भर्ती होनी है, जो 21 सितंबर को एक ही शिफ्ट (सुबह 11 से दोपहर 2 बजे) में आयोजित होनी है। छात्र संगठनों का कहना है कि आयोग की जिद से युवाओं की जिंदगी दांव पर लग रही है। IMD के अलर्ट के बावजूद परीक्षा कराना ‘जान से खिलवाड़’ जैसा है।


