देहरादून। पिटकुल के एमडी पीसी ध्यानी ने गढ़वाल क्षेत्र की निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया। भ्रमण के तहत रेलवे की आरवीएनएल परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन 132 केवी जीआईएस उपसंस्थान ऋषिकेश का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जीआईएस बिल्डिंग, कंट्रोल रूम बिल्डिंग, आउटडोर फाउंडेशन एवं निर्माण सामग्री की स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने निरीक्षण में कार्य की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कार्यदायी संस्था एवं संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और तत्काल मानव शक्ति बढ़ाने और शेष सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अधिशासी एवं सहायक अभियंताओं को सामग्री की समयबद्ध आपूर्ति, निर्माण एवं ऊर्जीकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर योजनाबद्ध रूप से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। समस्त कार्य 20 मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने टीम को उत्साहित करते हुए कहा कि प्रत्येक परियोजना में क्वालिटी, क्वांटिटी, सेफ्टी और समय से काम को पूरा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। निरीक्षण के दौरान 220 केवी ऋषिकेश के अधिशासी अभियंता को साइट से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य प्रातः 7:30 बजे से प्रारंभ कराया जाए तथा दैनिक प्रगति रिपोर्ट वीडियो के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए।
इसके उपरांत रेलवे की एक अन्य आर.वी.एन.एल. परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन 132 केवी जीआईएस उपसंस्थान रानीहाट, श्रीनगर का निरीक्षण किया गया। यहां भी जीआईएस बिल्डिंग, कंट्रोल रूम बिल्डिंग, सामग्री एवं गुणवत्ता मानकों की समीक्षा की गई। कार्य की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान साइट पर कार्यरत समस्त मानव शक्ति की समीक्षा की गई तथा श्रमिकों से संवाद कर उन्हें कार्य के प्रति प्रेरित किया गया। कार्यदायी संस्था को 03 दिवस के भीतर 100 अतिरिक्त श्रमिक लगाने एवं शेष सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सहायक एवं अवर अभियंताओं को योजनाबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। समस्त कार्य 15 मार्च तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
इस दौरान दोनों महिला अवर अभियंताओं को “लड़की हूं, लड़ सकती हूं, काम कर सकती हूं” कहकर प्रोत्साहित किया गया। इसके पश्चात 400 केवी पीपलकोटी–कर्णप्रयाग–श्रीनगर लाइन के पैकेज-2 एवं 3 के अंतर्गत टॉवर संख्या 69, 71 एवं 77A का निरीक्षण किया गया, जहां अलकनंदा नदी एवं राष्ट्रीय राजमार्ग की क्रॉसिंग हो रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित टॉवरों की सुरक्षा दीवार की गुणवत्ता बनाए रखने, सिविल एवं डिफेंस एविएशन नियमों का पालन करने तथा आवश्यक डे-नाइट मार्कर लगाने के निर्देश दिए गए। साथ ही सीईए, जीआरएलडीसी एवं सीटीयू से संबंधित सभी दस्तावेजी कार्य पूर्ण कर लाइन को शीघ्र ऊर्जीकृत करने के निर्देश दिए गए।
देर सायं प्रस्तावित 66 केवी उपसंस्थान नंदप्रयाग हेतु चयनित भूमि का निरीक्षण किया गया तथा शीघ्र भूमि हस्तांतरण के निर्देश दिए गए। इस दौरान मैसर्स हिमऊर्जा के प्रबंधक से नेटवर्क सुधार से संबंधित वाणिज्यिक विषयों पर बैठक करने के संबंध में चर्चा की गई।
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता, महाप्रबंधक, अधीक्षण अभियंता एवं परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिससे वित्त, डिजाइन एवं वाणिज्यिक मामलों का त्वरित समाधान साइट पर ही किया जा रहा है।


