देहरादून। भाजपा ने राहुल गांधी की तरफ से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार कहने को शर्मनाक और निंदनीय करार दिया है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि एक बार फिर कांग्रेसी गांधी परिवार ने देशभक्त सिख कौम के प्रति अपनी 1984 वाली घृणा का इजहार किया है। राहुल नेता प्रतिपक्ष और संसदीय पद की गरिमा लायक नहीं है, लिहाजा उन्हें तत्काल नैतिक तौर पर इस्तीफा देना चाहिए।
संसद परिसर में हुए इस घटनाक्रम को लेकर मीडिया द्वारा पूछे सवालों के ज़बाब में उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय मंत्री का नहीं बल्कि एक शहीद बेअंत सिंह के परिवार और समूची सिख समाज का अपमान है। रवनीत सिंह बिट्टू एक सिख परिवार से आते हैं जिसने देश की सेवा की है। उनके दादा पूर्व मुख्यमंत्री थे और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जान देने वाले थे। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष की गद्दार वाली टिप्पणी कतई स्वीकार्य नहीं है,जो उनके स्वयं के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। एक सिख को गद्दार यानि देश के साथ विश्वासघात करने वाला कहने जैसा है। यह समस्त सिख समुदाय के लिए एक गंभीर मुद्दा है और वे सभी राहुल गांधी के इस बयान से बेहद आहत हैं।
उन्होंने कहा, संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह संसदीय चर्चा शालीनता और सभ्य भाषा पर आधारित होनी चाहिए। लेकिन अफसोस नियम तोड़ने और असंवैधानिक कार्यों में राहुल गांधी हमेशा संसद में विपक्ष का नेतृत्व करते नजर आते हैं। शर्मनाक है कि जिनके परिवार ने देश के लिए जान कुर्बान कर दी, वे उन्हें उसे देशद्रोही बता रहे हैं, जबकि जो लोग देश को टुकड़ों में तोड़ने की बात करते हैं, उनके साथ वो हमेशा खड़े रहते हैं। उन्होंने तंज कसा कि लगता है कांग्रेसी युवराज अभी भी सामंती, शाही मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं। उन्होंने राहुल गांधी से इस्तीफा मांगते हुए कहा, उनके ऐसे शर्मनाक और घृणित व्यवहार के बाद राहुल को नेता प्रतिपक्ष ही नहीं, संसद सदस्य कहलाने का भी कोई नैतिक हक नहीं है। कांग्रेस के नकली गांधी परिवार की मानसिकता है कि देश की सेवा करने वाला हर व्यक्ति गद्दार है और उनके चरणों में गिरने वाला वफादार है।
उन्होंने 1984 के सिख दंगों की याद दिलाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की सिख-विरोधी मानसिकता एक बार फिर उजागर हुई है। क्योंकि देश नहीं भूला है जब 1984 में, राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार के शासनकाल में हजारों सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जिसमें कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं की स्पष्ट भूमिका थी और उन्हें बाद में कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री तक बनाया। लाखों सिख परिवार तबाह हो गए और दशकों तक उन्हें न्याय नहीं मिला। आज लाखों सिख भारतीय सशस्त्र बलों में सम्मान के साथ सेवा करते हैं। ऐसे में एक सिख को “देशद्रोही” कहना हर सिख सैनिक, हर शहीद, हर उस परिवार का अपमान है जिसने इस राष्ट्र के लिए बलिदान दिया है।


