देहरादून। लंबे समय से वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे विभिन्न संगठनों ने रविवार को राजधानी देहरादून में महापंचायत का आयोजन किया।

अंकिता भंडारी हत्याकांड न्याय यात्रा के तहत परेड मैदान में आयोजित इस महापंचायत में संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य सहित कई सामाजिक और जन संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में जुटे।
महापंचायत में मौजूद लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और कहा कि जब तक पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर दोषियोंए विशेषकर कथित वीआईपीए के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होतीए तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वक्ताओं ने मंच से कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना केवल एक परिवार का नहींए बल्कि पूरे समाज का सवाल बन चुका है। महापंचायत में अंकिता भंडारी के माता.पिता की मौजूदगी से माहौल भावुक हो गया।
उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि उन्हें अब भी पूरे सच के सामने आने का इंतजार है। परिजनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर न रखा जाए। संयुक्त संघर्ष मंच की संरक्षक कमला पंत ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब तक कई सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में कथित वीआईपी एंगल को लेकर स्थिति साफ नहीं की गई है।
उनका कहना है कि जब तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं होता और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होतीए तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस ने भी संयुक्त मोचे को अपना समर्थन दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्राी हरीश रावत ने कहा कि वर्तमान जांच केवल वीआईपी को बचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन इस जांच को पूरी तरह खारिज करता है। रावत ने कहा कि जन भावनाओं के अनुरूपए उच्चतम न्यायालय की देखरेख में सीबीआई जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर की जा रही सीबीआई जांच पूरी तरह छलावा है।
हरीश रावत ने आगे कहा कि इस केस में जिस शिकायतकर्ता की शिकायत को आधार बनाकर जांच की जा रही हैए वह सरकार द्वारा प्रायोजित है। उन्होंने उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा पर लगातार डाकाए उनके साथ दुर्व्यवहार और दुष्कर्म की घटनाओं को रेखांकित किया। रावत ने कहा कि इसमें कामकाजी महिलाएं भी शामिल हैं।
संयुक्त संघर्ष मंच और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने प्रदेशभर में जन जागरण अभियान चलाने और चरणबद्ध आंदोलन करने की चेतावनी भी दी।
महापंचायत में बड़ी संख्या में युवाए महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे। परेड मैदान में जुटी भीड़ ने एक स्वर में न्याय की मांग करते हुए सरकार से त्वरित और ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। आयोजन के चलते क्षेत्रा में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई थी, जबकि पुलिस प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।


