एआई समिट में कांग्रेस की शर्मनाक हरकत को देश कभी माफ नहीं करेगा: रुचि भट्ट

एआई समिट में कांग्रेस की शर्मनाक हरकत को देश कभी माफ नहीं करेगा: रुचि भट्ट

* राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष रहने का कोई हक नहीं : रुचि भट्ट

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा, उत्तराखंड की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रुचि भट्ट की ओर से यह कड़ा बयान जारी किया गया कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय एआई समिट जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इंडियन यूथ कांग्रेस किया गया कृत्य न केवल निंदनीय है, बल्कि पूरे राष्ट्र की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है। जिस मंच का उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व को प्रस्तुत करना था, वहां कांग्रेस ने अपनी नकारात्मक राजनीति से देश को शर्मसार करने का प्रयास किया। कांग्रेस का यह आचरण दर्शाता है कि वह राष्ट्रीय हितों से ऊपर अपनी संकीर्ण और अवसरवादी राजनीति को रखती है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि को धूमिल करना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। रुचि भट्ट ने कहा कि ये कोई पहली बार नहीं है कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ऐसी घटिया हरकत की है। यह वही कांग्रेस है जो बार-बार भारत की प्रगति, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा को कमजोर करने के प्रयास करती रही है। महिला मोर्चा इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करता है और इसे राष्ट्र-विरोधी मानसिकता का प्रत्यक्ष उदाहरण मानता है। बहुत से विपक्षी दलों ने भी माना है कि कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की ये हरकत माफ़ करने योग्य नहीं है।

इस शर्मनाक कृत्य के विरोध में भाजपा महिला मोर्चा उत्तराखंड की कार्यकर्ताओं ने देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, ऊधमसिंह नगर सहित प्रदेश के सभी जिलों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किए। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर महिला कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की और स्पष्ट संदेश दिया कि देश की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कई स्थानों पर प्रतीकात्मक पुतला दहन कर कांग्रेस की राष्ट्र-विरोधी सोच के प्रति जनाक्रोश व्यक्त किया गया।

रुचि भट्ट ने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा, उत्तराखंड यह स्पष्ट करना चाहता है कि भारत की महिलाएं राष्ट्र के सम्मान और स्वाभिमान के लिए सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं। हम मांग करते हैं कि राहुल गांधी अपनी पार्टी की इस शर्मनाक हरकत की जिम्मेदारी लेते हुए नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़े और लोकसभा से इस्तीफा दे। साथ ही अपने इस गैर-जिम्मेदाराना कृत्य के लिए देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के हितों के विरुद्ध राजनीति करने से बाज आए।

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