* कांग्रेस चिंता करे, इस्तीफा या मौन धारण कर कोप भवन जाने वालों की : भट्ट
देहरादून। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने उनके कहे शब्दों पर कांग्रेसी आपत्तियों को कांग्रेसी द्विअर्थी सोच का नतीजा बताते हुए कहा, जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। वहीं पुनः स्पष्ट किया कि जो अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार के चलते भाजपा से रिजेक्ट हुए, वही कांग्रेस में सिलेक्ट हुए हैं। हालत ये है कि आने वालों से अधिक संख्या नाराज लोगों की है, कोई इस्तीफा तो कोई मौन धारण कर कोप भवन चला गया है।
पार्टी मुख्यालय में मीडिया से हुई अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने अपने बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल की आपत्ति को सिरे से नकार दिया। कहा, गलती बयान में नहीं बल्कि कांग्रेस नेताओं की द्विअर्थी सोच के तरीके में है। जो सोच कांग्रेस नेताओं के मन में अपने ही साथी नेताओं के प्रति रहती है, वही अर्थ उनको समझ में आया है। ऐसी स्थिति के लिए रामायण में पहले ही तुलसी दास जी कह गए हैं, “जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी”।
उन्होंने एक बार फिर अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा, कुछ लोगों का कल कांग्रेस में शामिल होना, अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा है। इनमें अधिकांश को भाजपा अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण के चलते बहुत पहले पार्टी से निकाल चुकी है। इन्होंने जनता के बीच जाकर भी चुनाव में अपना पक्ष रखा, वहां भी नकारे गए। लिहाजा यह कहने में कोई संकोच नहीं कि भाजपा और जनता से रिजेक्टेड लोग कांग्रेस के लिए सिलेक्टेड हो गए है। फिलहाल उनकी खुशफहनी उन्हें मुबारक, लेकिन भाजपा अनुशासन, नैतिकता और आचरण को लेकर कभी समझौता नहीं करती है।
उन्होंने हरीश रावत के मौन व्रत और गुटबाजी पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में कुछ लोगों के आने से, बहुत सारे लोगों का अब जाना निश्चित हो गया है। संभवत उनके बड़े-बड़े नेता और सबसे बड़े नेता भी इस नई भर्ती से नाखुश हैं। कुछ इस्तीफा दे रहे हैं कोई मौन धारण कर कोप भवन में बैठ गए। लिहाजा आने वाले दिनों में जो थोड़े बहुत स्वाभिमान वाले बड़े और बहुत बड़े नेता भी वहां कुछ दिनों के मेहमान हो सकते हैं। लिहाजा अपने यहां आने वाले नेताओं की सूची से पहले कांग्रेस को अपने शेष बचे नेताओं की सूची संभालने की जरूरत है।

