महिलाओं को अपना अधिकार लेने से अब कोई रोक नहीं पाएगा: भट्ट

महिलाओं को अपना अधिकार लेने से अब कोई रोक नहीं पाएगा: भट्ट

* पीएम के नेतृत्व में आधी आबादी को पूरा अधिकार देगी संसद : भाजपा

* विपक्ष राजनैतिक विरोध छोड़, नारी शक्ति के बिल का करें समर्थन : भट्ट

देहरादून। भाजपा ने कल से होने वाले संसद के विशेष सत्र को आधी आबादी को उसके पूरे अधिकार देने की दिशा में इतिहास सृजन करने वाला बताया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  महेंद्र भट्ट ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में मातृ शक्ति को संवैधानिक अधिकार देने का यही समय है, सही समय है। उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्ष को भी सुझाव दिया कि राजनैतिक विरोध छोड़ें और महिला आरक्षण संशोधन बिल का समर्थन करें। क्योंकि देश की नारियों को अपना अधिकार लेने से अब कोई रोक नहीं पाएगा।

उन्होंने मीडिया के माध्यम दी गई अपनी प्रतिक्रिया कहा, मातृ शक्ति को समुचित संवैधानिक अधिकार देने में देश पहले से ही बहुत पीछे है। ऐसे में 2023 में पास इस नारी शक्ति वंदन कानून को तय समय से पहले ही 2029 लागू करने की कोशिशों पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वो भी तब जब विपक्ष इसे 2024 के चुनावों से ही लागू करने की मांग करता रहा हो। लिहाजा देश अच्छी तरह तरह देख समझ रहा है कि जल्दी लागू करने के प्रयासों का विरोध क्यों हो रहा है।

उन्होंने सोनिया गांधी और कांग्रेस की महिला आरक्षण में एससी एसटी तरह, कानून में ओबीसी को शामिल करने की बहस छेड़ना पूरी तरह से महिला अधिकारों की रेल को डिरेल करने की तैयारी बताया। क्योंकि सभी जानते हैं कि संवैधानिक जनप्रतिनिधित्व में ओबीसी आरक्षण देना संविधान प्रावधानों में नहीं है। जिसको लेकर विस्तृत्व चर्चा मूल कानून के पास होने के दौरान हुई थी, तब सभी ने वर्तमान कानून को पास किया था। ऐसे अब दोबारा से इस चर्चा को करना, कहीं न कहीं कानून संशोधन को बाधित करना है।

वहीं परिसीमन को लेकर आने वाले संशोधन को भी उन्होंने महिला सशक्तिकरण की इस कोशिश में बेहद अहम बताया। चूंकि संसद और विधानसभाओं में किसी का प्रतिनिधित्व कम न हो, इसलिए महिला आरक्षण के समय ही स्पष्ट किया गया था कि ये सभी आरक्षित सीटें वर्तमान संख्याओं के अतिरिक्त होंगी। उसमें भी दक्षिण के राज्यों और जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों की सीटें कम न हो, उसके लिए ही परिसीमन को राज्यवार वर्तमान संख्या के आधार पर भी लगभग 33 फीसदी बढ़ोत्तरी से किया जायेगा। ऐसे में कांग्रेस का ये दोगलापन कि महिला आरक्षण जल्दी मिले लेकिन नई जनगणना के अनुसार होने वाले परिसीमन के बाद। मंशा साफ है कि परिसीमन पर भ्रम फैलाकर नारी को उसके अधिकारों से वंचित किया जाए। जबकि परिसीमन: एक अनिवार्य संवैधानिक प्रक्रिया ​है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता कि बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व संतुलित रहे। साथ ही महिला आरक्षण का लाभ देश के हर कोने तक समान रूप से पहुँचे।

उन्होंने विपक्ष की मंशा पर सवाल करते हुए कहा, दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिला आरक्षण को कभी प्राथमिकता नहीं दी। देश ने देखा कि जो दल आज महिला हितैषी होने का ढोंग कर रहे हैं, उन्होंने पूर्व में संसद के भीतर इस विधेयक की प्रतियां फाड़ने और इसे अनिश्चितकाल के लिए लटकाने का कार्य किया था।

​उन्होंने विश्वास दिलाया कि भाजपा देश की महिलाओं को आश्वस्त करती है कि किसी भी अवरोध को सफल नहीं होने दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी का महिला नेतृत्व वाले विकास का विजन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारे लिए महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि पार्टी के लिए एक मिशन है। विपक्ष चाहे कितनी भी बाधाएं उत्पन्न करे, नारी शक्ति को उनका अधिकार मिलना अब तय है।

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