गजब: खोदा पहाड़, निकली चुहिया

गजब: खोदा पहाड़, निकली चुहिया

मामचन्द शाह/देहरादून। बीते पखवाड़े उत्तराखंड में तीन खबरों ने खासी सुर्खियां बटोरीं, जिन्हें पढ़कर आम जनमानस की नजरें यह देखने के लिए उत्सुक हुई कि इस बार तो संबंधितों पर गाज गिरनी तय है! पहली खबर देहरादून के राजपुर रोड स्थित रोमियो लेन बार से जुड़ी थी। जिसमें निर्धारित समय रात्रि 12 बजे के बाद भी वहां पार्टी चल रही थी और तेज संगीत बज रहा था। दूसरी खबर उत्तराखंड के धाकड़ धामी सरकार के नए-नवेले मंत्री खजान दास से जुड़ा हुआ था। आरोप है कि उन्होंने राजाजी पार्क क्षेत्र के भीतर स्थित सुरेश्वरी मंदिर में अपने पुत्र की शादी समारोह आयोजित कराया। तीसरी खबर बद्री केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कपरवाण से जुड़ा था। जिसमें उपाध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी को ही अपने कार्यालय की परिचारिका दिखाकर उसके खाते में पैसे डलवाए।

रोमियो लेन बार मामला..

अप्रैल के अंतिम सप्ताह में सर्वाधिक चर्चित देहरादून के रोमियो लेन बार में रात्रि साढ़े 12 बजे तक बार में जाम छलकने के साथ ही तेज धुन में संगीत बजने वाली खबर रही। अखबारों की सुर्खियों के मुताबिक सूचना पर एसपी सिटी प्रमोद कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे तो सामने आईजी राजीव स्वरूप को सामने देखा। एसपी सिटी ने एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल को इस मामले की जानकारी दी। जिस पर एसएसपी मौके पर पहुंचे और बार को बंद कराया। हालांकि तब तक आईजी वहां से निकल चुके थे।

वहीं दूसरा पक्ष आईजी की तरफ से भी आया। उनका कहना था कि वे अपने परिवार के साथ वहां भोजन करने गए थे। उस दौरान वहां अचानक लाइट बंद हो गई। जिस पर वे पूछताछ के लिए बाहर आए और लाइट बंद होने का कारण पूछा। इस दौरान उन्होंने देखा कि वहां कई थानों की पुलिस के साथ कई सीओ भी मौजूद थे। इस पर उन्होंने पूछा कि आप लोग अपने संवेदनशील क्षेत्रों को छोड़कर इतनी दूर क्यों आए हो! जिसके बाद वे वहां से चले गए। इस मामले ने मीडिया की सुर्खियां इसलिए भी बटोरी कि कुछ समय पहले ही इस क्षेत्र में रि. ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। वह मामला भी बार से ही जुड़ा हुआ था। जिसके बार देहरादून पुलिस भी काफी सख्ती बरत रही है। मामला जब पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा तो एडीजी कानून व्यवस्था डा. वी. मुरुगेशन, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप और एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल से तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

वहीं एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने भी अपना पक्ष रखा और उन्होंने इस खबर को तथ्यहीन और भ्रामक बताया। उनका कहना था कि मेरे द्वारा अपनी टीमों को कुठाल गेट पर एकत्र किया गया था। वहां से तीन भागों मैं टीम को विभाजित कर अलग-अलग जगह चेकिंग

को भेजा गया, जबकि एक टीम के साथ मैं स्वयं कुठाल गेट पर चेकिंग कर रहा था। मैं उक्त बार में गया ही नहीं था न ही उच्चाधिकारियों से इस संबंध में कोई वार्ता हुई न ही कोई आमना-सामना हुआ। हां उच्चाधिकारी वहां परिवार के साथ खाने के लिए गए थे और लाइट बंद होने पर उन्होंने सवाल पूछा था। लेकिन मैं वहां गया ही नहीं था।

राजाजी पार्क क्षेत्र में मंत्री के पुत्र की शादी मामला..

राजाजी टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में काबीना मंत्री खजान दास के पुत्र की 26 अप्रैल को शादी के मामले ने भी मीडिया की खूब सुर्खियां बटोरी। इस संबंध में मंत्री का कहना था कि विभाग ने पहले ही बता दिया होता तो वे इस समारोह को कहीं अन्यत्र कर देते, लेकिन उन्हें अनुमति दी गई थी। मंत्री के अनुसार यह मामला वरिष्ठ अधिकारी के संज्ञान में था और उन्होंने इसकी मौखिक रूप से स्वीकृति भी दी थी। उन्होंने उक्त अधिकारी को भी शादी में आमंत्रित किया था। उन्होंने बहुत ही सामान्य तरीके से यह समारोह संपन्न कराया। मंत्री के परिजनों ने भी अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उनका पुत्र बीमारी से जूझ रहा था। उसी दौरान वे मंदिर दर्शन को गए थे और उन्होंने संकल्प लिया था कि वह ठीक हो जाएगा तो उसकी शादी सुरेश्वरी देवी मंदिर में ही संपन्न कराएंगे। इसी संकल्प के चलते उन्हें इस शादी को यहां संपन्न करवानी पड़ी।

हालाकि शादी संपन्न होने के बाद वन विभाग ने फील्ड अधिकारियों पर कार्रवाई की है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मंदिर समिति के नामजद दो पदाधिकारियों सहित अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस प्रकरण की वाइल्ड लाइफ वार्डन अजय लिंगवाल को जांच सौंपी गई है।

बीकेटीसी उपाध्यक्ष से जुड़ा मामला सामाजिक कार्यकर्ता विकेश नेगी को आरटीआई में मिले दस्तावेजों के अनुसार कबीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण ने अपनी पत्नी गंगा देवी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिखाकर 12 हजार रुपए प्रतिमाह लिए। यहीं नहीं उपाध्यक्ष को देहरादून कार्यालय में कक्ष आवंटित है। बावजूद इसके उन्होंने रुद्रप्रयाग में कार्यालय के नाम पर 25 हजार रुपए महीना भत्ता ले रहे हैं। इस पर विजय कपरवाण का कहना है कि उनकी पत्नी बीकेटीसी में कर्मचारी नहीं है। मेरे निजी स्टाफ में दो महिलाकर्मी हैं। उनका वेतन अलग-अलग निकालने के बजाय गंगा देवी के नाम से बिल लगाकर बीकेटीसी से पैसा लिया। यह अधिकारियों के संज्ञान में भी था, लेकिन साजिश के तहत मुझे बदनाम किया जा रहा है।

उपरोक्त तीनों मामलों में कौन सही है और कौन गलत, यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन फिलहाल तो अप्रैल के अंतिम सप्ताह में खबरों के इस बवंडर के बीच देवभूमि उत्तराखंड के आम जनमानस तो इन तीनों प्रकरणों से ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’ वाली कहावत ही नजर आई !

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