देहरादून। डीएम सविन बंसल की संवेदनशील पहल से एक परिवार टूटने से बच गया। 70 वर्षीय बुजुर्ग दंपति, जिन्होंने अपने पुत्र और पुत्रवधु को घर से बेदखल करने के लिए भरणपोषण अधिनियम के तहत डीएम न्यायालय में वाद दायर किया था, अब सुलह के रास्ते पर हैं।
खुड़बुड़ा निवासी जसंवत सिंह और उनकी पत्नी ने अगस्त माह में डीएम कार्यालय पहुंचकर अपने बेटे और पुत्रवधु द्वारा कथित प्रताड़ना की शिकायत की थी और उन्हें घर से बेदखल करने की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने दोनों पक्षों को दो बार बुलाकर धैर्यपूर्वक वार्ता की।
डीएम सविन बंसल ने दंपति को समझाया कि निर्धन बेटे-बहू और उनके तीन नाबालिग बच्चों को घर से निकालना किसी भी पक्ष के लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि “संघर्ष और मतभेद हर परिवार में होते हैं, लेकिन संवाद और सहयोग से हर संबंध को बचाया जा सकता है।”
जिलाधिकारी ने न केवल बुजुर्ग दंपति को बेटे-बहू की जिम्मेदारियों का स्मरण कराया, बल्कि पुत्रवधु और बेटे को भी अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा दी। आपसी समझाइश और भावनात्मक वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने और साथ रहने पर सहमति जताई। मामले की निरंतर मॉनिटरिंग जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी ताकि भविष्य में फिर कोई विवाद न उत्पन्न हो।
बुजुर्ग दंपति के चार पुत्र हैं, जिनमें दो अलग रहते हैं, एक दिव्यांग है और चौथा पुत्र बंसी अपने तीन नाबालिग बच्चों के साथ रहता है। बंसी का कपड़ों का छोटा व्यवसाय है और आर्थिक स्थिति कमजोर है। इसी पारिवारिक दबाव के चलते विवाद उत्पन्न हुआ था।
डीएम सविन बंसल ने अपने व्यवहार, धैर्य और मानवता के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए न केवल एक परिवार को टूटने से बचाया, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ सामाजिक सरोकार का भी परिचय दिया।


