जमरानी, लखवाड परियोजना होगी गेमचेंजर, दोगुनी से अधिक होगी सिंचित भूमि

जमरानी, लखवाड परियोजना होगी गेमचेंजर, दोगुनी से अधिक होगी सिंचित भूमि

देहरादून। उत्तराखंड में जमरानी और लखवाड परियोजना हर खेत को पानी देने में साबित होगी गैंचेजर, दोगुनी से अधिक हो जाएगी सिंचित कृषि भूमि। केंद्र द्वार प्राप्त जानकारी अनुसार, वर्तमान में सतही लघु सिंचाई और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से लगभग 64 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि हो रही सिंचित। केंद्र द्वारा बताया गया कि उनका विशेष ध्यान, सिंचाई की दृष्टि से प्रदेश के 7 अत्यंत उच्च जोखिम और 2 उच्च जोखिम की श्रेणी में आने वाले जिलों पर है।

प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  महेंद्र भट्ट द्वारा सदन में उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन का सिंचाई पर प्रभाव को लेकर मांगी गई ती जानकारी। जिसके ज़बाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने जलवायु परिवर्तन के प्रति राष्ट्रीय नवाचार परियोजना के अंतर्गत अंतरसरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल आईपीसीसी प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए उत्तराखंड सहित भारतीय कृषि के जलवायु परिवर्तन के जोखिम और संवेदनशीलता का आकलन किया। कुल 109 जिलों को अत्यंत उच्च जोखिम वाली श्रेणी में और 201 जिलों को अत्यधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। उत्तराखंड में, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा और चंपावत जिले अत्यंत उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं, जबकि चमोली और पौड़ी गढ़वाल उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं और नमी की कमी/सूखे के प्रति संवेदनशील हैं।

वर्ष 2015-16 में सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरू की, जिसका उ‌द्देश्य खेतों में पानी की वास्तविकता उपलब्धता बढ़ाना, सुनिश्चित सिंचाई के अंतर्गत कृषि योग्य क्षेत्रों का विस्तार करना, खेतों में जल उपयोग की दक्षता में सुधार करना, सतत जल संरक्षण पद्धतियों को कार्यान्वित करना आदि था। पीएमकेएसवाई के एआईबीपी घटक के तहत, जमरानी बांध बहुउ‌द्देशीय परियोजना और लखवाड बहुउ‌द्देशीय राष्ट्रीय परियोजना को कार्यान्वित किया जा रहा है, जिनकी लक्षित सिंचाई क्षमता क्रमशः 57.07 हजार हेक्टेयर और 33.78 हजार हेक्टेयर है। इनसे उत्तराखंड राज्य को लाभ होता है और मानसून के दौरान जल भंडारण और कम सिंचाई वाले मौसम में इसके नियमित उपयोग में सुविधा मिलती है, जिससे वर्षा पर निर्भरता कम होती है।

पीएमकेएसवाई-हर खेत को पानी के तहत, उत्तराखंड में अब तक सतही लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत लगभग 29.92 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित की गई है। इसके अलावा, पीएमकेएसवाई के भूमि संसाधन विभाग द्वारा वाटरशेड विकास घटक का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों में मुख्य रूप से मेड़ क्षेत्र उपचार, जल निकासी लाइन उपचार, मृदा एवं नमी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पौध संवर्धन, चारागाह विकास, सूक्ष्म सिंचाई सहायता सहित उत्पादन प्रणाली सहायता, संपत्तिहीन व्यक्तियों के लिए आजीविका आदि शामिल हैं। उत्तराखंड में वर्ष 2015-16 से 2021-22 के दौरान 62 वाटरशेड विकास परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 2021-26 के दौरान डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई-2.0 के तहत 15 वाटरशेड विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग वर्ष 2015-16 से देश में प्रति बूंद अधिक फसल योजना कार्यान्वित कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना है। उत्तराखंड में इस योजना की शुरुआत से अब तक 35647 हेक्टेयर क्षेत्र सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत कवर किया गया है।

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