देहरादून। केंद्र सरकार चारधाम यात्रा मार्ग में भूस्खलन निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर अध्ययन कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति को लेकर पूछे गए सवाल के ज़बाब में यह जानकारी सामने आई है।
महेंद्र भट्ट द्वारा सदन में एनएच को लेकर मांगी जानकारी के ज़बाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने बताया कि उत्तराखंड राज्य में स्थित राष्ट्रीय राजमार्गों सहित राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास और रखरखाव एक सतत प्रक्रिया है। राष्ट्रीय राजमार्गों को यातायात योग्य स्थिति में बनाए रखने के लिए यातायात सघनता, सड़क की स्थिति और प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ तालमेल के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर कार्य किए जा रहे हैं।
सरकार परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों की निगरानी के अतिरिक्त, परियोजना में विलंब होने से बचने या देरी कम करने के लिए विभिन्न पहले की जा हैं। जिनमें भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी को सुव्यवस्थित करना, रेलवे सड़क ऊपरि पुल, सड़क अधोगामी पुल के सामान्य व्यवस्था आरेख का ऑनलाइन अनुमोदन, विवाद समाधान तंत्र का पुनर्गठन, प्रीमियम का पुनर्निर्धारण, एकबारगी निधि निवेश आदि शामिल हैं।
पहाडी राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों एनएच सहित राष्ट्रीय राजमार्गों के आपदा रोधी अवसंरचना के विकास के लिए विभिन्न पहले की गई हैं। जिनमें पर्वतीय ढलानों की अस्थिरता के आकलन के लिए, उपकरण का उपयोग करते हुए और वास्तविक समय की निगरानी के लिए दिशानिर्देश तैयार करने हेतु एक अनुसंधान योजना के लिए आईआईटी रुड़की को वित्त पोषण के माध्यम से पहल की गई है। उत्तराखंड के चारधाम तीर्थयात्रा मार्ग के 100 किलोमीटर लंबे खंड के साथ इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक एपर्चर रडार आधारित भूस्खलन निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अध्ययन पर काम किया जा रहा है।
इसी क्रम में उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश राज्यों के लिए भूस्खलन से निपटने के विशेष उपाय कार्यों हेतु टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसी तरह पर्वतीय क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए सड़क निर्माण कार्यों से पहले ढलान काटने और स्थिरीकरण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। खंड वार सुरक्षा उपाय पूरे होने पर ही सड़क निर्माण कार्य शुरू किए जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्गों पर भू-खतरों के शमन उपायों के तकनीकी सहयोग हेतु रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के साथ समझौता किया गया है। सुरंगों की भूवैज्ञानिक जांच और भू-खतरों के अध्ययन के लिए डेटा साझा करने हेतु भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के साथ काम किया जा रहा है। सुरंग परियोजनाओं, सड़क परियोजनाओं आदि के लिए भू-तकनीकी जांच पड़ताल, डीपीआर, निर्माण चरण के दौरान सुरंग के डिजाइन और रेखाचित्रों (ड्राइंग) की समीक्षा, प्रूफ चेक किया जा रहा है।
केंद्र ने तय किया है कि सड़क निर्माण से पहले ढलान की कटाई और स्थिरीकरण का अनिवार्य कार्य पूरा किया जाए, खंड-वार सुरक्षा उपाय कार्यान्वित करने पर ही सड़क निर्माण कार्य शुरु किया जाएगा।
इसी प्रकार पहाड़ी क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए अतिरिक्त संवर्धित और सुव्यवस्थित सुधारात्मक उपार्यों पर नवंबर 2025 को जारी नीति अनुशार अब डीपीआर की गुणवत्ता में सुधार करना, ढलान की सुरक्षा और जल निकासी के लिए पर्याप्त उपाय सुनिश्चित करना, पहाड़ी इलाकों में निर्माण पद्धतियों को बेहतर बनाना, निर्माण के लिए पर्याप्त समय प्रदान करना, निगरानी और भूस्खलन की प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ करना शामिल हैं। इसमें कुछ अन्य विस्तृत दिशा-निर्देश सिद्धांत भी शामिल हैं जैसे संरेखण मार्ग चयन और चौड़ीकरण प्रस्ताव, अतिरिक्त मार्गाधिकार योजना बनाना, कीचड़ निपटान के लिए कूड़ाघरों को चिह्नित करना, ढलान संरक्षण और जल निकासी उपायों का डिजाइन, बेहतर निर्माण पद्धतियां और निर्माण के बाद का रख रखाव।

