खांड गांव में गूंजा एकता का संदेश, भव्य विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब

खांड गांव में गूंजा एकता का संदेश, भव्य विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब

* समभाव, ‘कुटुंब प्रबोधन’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ ही असली हिंदू दर्शन का विराट स्वरूप : दिनेश प्रसाद सेमवाल

ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश के खांड गांव में शनिवार को श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ भव्य विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।

शनिवार को खांड गांव में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला प्रतिनिधियों, युवाओं तथा विभिन्न हिंदू संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने भाग लिया। आयोजन को लेकर क्षेत्र में पूर्व से ही विशेष उत्साह का वातावरण बना हुआ था।

सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। पूरे परिसर में धार्मिक नारों, जयघोष और भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि गूंज रही थी। आयोजन स्थल को भगवा ध्वजों, आकर्षक पुष्प सज्जा और धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित किया गया था, जिससे कार्यक्रम की भव्यता और भी निखर उठी।

सम्मेलन का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंचासीन संत-महात्माओं एवं अतिथियों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड प्रांत कार्यवाह दिनेश प्रसाद सेमवाल ने समाज को संगठित और सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती सामाजिक कुरीतियों, विघटनकारी प्रवृत्तियों और नैतिक पतन को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं। युवाओं से आह्वान करते हुए उन्होंने राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

उन्होंने हिंदू दर्शन के विराट स्वरूप का उल्लेख करते हुए ‘समभाव’, ‘कुटुंब प्रबोधन’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि बाल व्यास वैदेही नंदन पंडित वेदांत महाराज तथा महिला वक्ता के रूप में प्रोफेसर (मनोविज्ञान विभाग) डॉ. रश्मि त्यागी रावत ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने हिंदू धर्म की महत्ता, उसकी सर्वसमावेशी विचारधारा और सांस्कृतिक परंपराओं की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने कहा कि सनातन परंपरा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देती है। धर्म की मान्यताएं समाज में परस्पर सम्मान, नैतिक आचरण और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और समाज में जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम हैं।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को समाज की शक्ति बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि संगठित समाज ही हर चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।

सम्मेलन में सामाजिक मुद्दों पर मंथन करते हुए अन्य वक्ताओं ने गौ संरक्षण, धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखने, युवाओं में नैतिक शिक्षा के प्रसार, नशामुक्त समाज के निर्माण और सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार रखे। वक्ताओं ने आह्वान किया कि समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा।

कार्यक्रम संयोजक एवं सीता सखी समिति की प्रांत संयोजक तथा पूर्व महापौर अनीता ममगाईं ने कहा कि सनातन संस्कृति विश्व को एकता और मानवता का संदेश देती है। उन्होंने समाज से अपने मूल्यों और परंपराओं को सहेजते हुए संगठित होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत भजन-कीर्तन, देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक नृत्यों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालुओं ने तालियों और जयघोष के साथ उत्साहवर्धन किया।

सम्मेलन के समापन अवसर पर फूलों की होली का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया। रंग-बिरंगे पुष्पों की वर्षा के बीच वातावरण आध्यात्मिक और उल्लासमय हो उठा।

समूचे आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक चेतना, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश प्रसारित किया। सम्मेलन को सफल बनाने में आयोजकों एवं स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में महामंडलेश्वर दयाराम दास जी महाराज, केशव स्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज, अखंड आनंद जी महाराज सभी लोग उपस्थित रहे।

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