राज्यसभा सांसद भट्ट ने वन्यजीवों हमलों की गंभीर होती समस्या को संसद में उठाया

राज्यसभा सांसद भट्ट ने वन्यजीवों हमलों की गंभीर होती समस्या को संसद में उठाया

* वन्यजीव हमलों पर विशेष कार्ययोजना बनाने और अधिक आर्थिक मदद का किया आग्रह

* वन्यजीव हमलों में 1264 मौतों के आंकड़ों रख, उच्च सदन का ध्यान कराया आकृष्ट

देहरादून। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने वन्यजीवों हमलों की लगातार गंभीर होती समस्या को लेकर केंद्र से विशेष कार्ययोजना बनाने का आग्रह किया है। उच्च सदन में बोलते हुए उन्होंने राज्य निर्माण के बाद हुए नुकसान का विवरण देते हुए केंद्र सरकार का ध्यान इसकी तरफ आकृष्ट कराया और केंद्र से प्रभावित परिजनों को अधिक आर्थिक मदद की मांग की है।

उन्होंने राज्यसभा में कहा, उत्तराखंड में मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। जिसके चलते स्थानीय लोगों द्वारा जान से हाथ धोने के साथ गंभीर रूप से घायलों की बड़ी संख्या सामने आ रही हैं। उन्होंने राज्य निर्माण के बाद से जंगली जानवरों के हमले में प्रभावित हुए लोगों की विस्तृत जानकारी रखते हुए बताया कि विगत 25 वर्षों में 1264 लोगों की मौत के अतरिक्त 6519 लोग घायल इन घटनाओं के शिकार हुए हैं। जिसमें सबसे अधिक गुलदार के हमलों में 546 की मौत और 2126 लोग घायल हुए हैं। इसी तरह हाथी के हमलों में 230 की मौत एवं 234 घायल, बाघ में 106 की मौत, 134 घायल, भालू में 71 की मौत एवं 2012 घायल, सांप में 360 की मौत 1056 घायल और मगरमच्छ के हमलों में भी 69 की मौत एवं 44 घायल हुए हैं।

इसी तरह वर्तमान वर्ष में भी अब तक भालू के हमलों में 5 और बाघ गुलदार के हमलों के 19 की मौत के साथ कुल 24 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं एवं 130 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कल पौड़ी में हुई गुलदार के हमले में हुई मौत का जिक्र करते हुए चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग आदि स्थानों की हाल में हुई दुखद घटनाओं की जानकारी भी दी।

उन्होंने सदन के माध्यम से केंद्र से अनुरोध किया कि समस्या की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष कार्ययोजना बनाई जाए, विशेषकर उत्तराखंड एवं अन्य हिमालई राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए। क्योंकि अधिक वनाच्दित भूभाग होने और जंगलों पर निर्भरता के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में यह समस्या बेहद विकराल रूप में सामने आ रही है।

उन्होंने आग्रह किया कि केंद्र एवं राज्य से मृतकों को मुआवजा राशि के रूप में अधिक से अधिक मदद को लेकर शीघ्र पॉलिसी बनाई जाए। वहीं घायलों का भी पूरा इलाज सरकार के माध्यम से हो ताकि पीड़ित परिजनों की समुचित मदद हो सके।

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