देहरादून। रविवार को अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजधानी की सड़कों पर भारी जन सैलाब देखने को मिला। विभिन्न सामाजिक संगठनों, विपक्षी राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों के लोग मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने के लिए परेड ग्राउंड से विशाल रैली निकाली।
वहीं इसकी गूंज देहरादून से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। देहरादून के साथ-साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर उत्तराखंड से जुड़ी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने विरोध प्रदर्शन किया है।

प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन इसके माध्यम से सरकार और प्रशासन को यह संदेश देना चाहते हैं कि अंकिता भंडारी केस में अब तक की जांच अपर्याप्त रही है और सीबीआई जांच की आवश्यकता है।

संगठनों के प्रतिनिधियों ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अंकिता हत्याकांड में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। ऐसे में केवल स्थानीय जांच से सच्चाई सामने नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि सरकार को इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को समझते हुए इसे केंद्रीय जांच एजेंसी के पास सौंपना चाहिए।

प्रदर्शन की शुरुआत रविवार सुबह से ही परेड ग्राउंड से हुई। जहां सैकड़ों लोग बैनर और पोस्टर लेकर इकट्टा हुए। उन्होंने अंकिता को न्याय दो और सीबीआई जांच जरूरी जैसे नारे लगाते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च किया।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और छात्र भी शामिल रहे। शहर प्रशासन ने इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। पुलिस ने मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कर रैली के मार्ग को नियंत्रित किया और भीड़ पर नजर रखने के लिए भारी पुलिसबल तैनात किया गया। यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त वाहन और मोबाइल पिकेट तैनात किए।
सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाने और अपराधियों को सजा दिलाने के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक इस तरह के शांतिपूर्ण आंदोलनों का सिलसिला जारी रहेगा। राजधानी में इस रैली ने सुबह से ही सड़कों पर हलचल पैदा कर दी। कई मार्गों पर वाहन और आम लोग जाम के कारण प्रभावित हुए।
11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान
वहीं मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में सीबीआई से जांच कराए जाने और बीआईपी को एक सप्ताह में गिरफ्तार नहीं किया गया तो 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद किया जाएगा।


