सदन में दिनभर हंगामा और रात में सोने वाले विपक्ष की सत्रावधि पर चिंता पाखंड : भट्ट

सदन में दिनभर हंगामा और रात में सोने वाले विपक्ष की सत्रावधि पर चिंता पाखंड : भट्ट

* जब विपक्ष भी कार्यमंत्रणा समिति के अंदर, फिर अवधि पर आपत्ति क्यों बाहर : भाजपा

* सार्थक चर्चा के लिए समय से अधिक, मंशा का सही होना अतिआवश्यक : भट्ट

देहरादून। भाजपा ने कांग्रेसी आरोपों पर पलटवार किया कि सदन में जिनके विधायक दिन में हंगामा और रात सोने का काम करते हों उनकी सत्र की अवधि पर चिंता पाखंड है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने विपक्षी आपत्ति पर हैरानी जताई कि सत्र की अवधि को कार्यमंत्रणा समिति, सदन के बिजनेस पर निर्धारित करती है, जिसमें विपक्ष भी शामिल है। साथ ही निशाना साधा कि सार्थक चर्चा के लिए समय से अधिक, मंशा का सही होना अति आवश्यक होता है।

मीडिया के सवालों का ज़बाब देते हुए उन्होंने कहा, आगामी 9 मार्च से गैरसैण में होने वाला बजट सत्र, प्रदेश की आर्थिक समृद्धि और जनकल्याणकारी योजनाओं को सामने लेकर आने वाला है। अब चूंकि ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण देवभूमि की जनभावनाओं का केंद्र है, ऐसे में वहां बजट सत्र का आयोजन होना गौरवशाली अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्र के दौरान नीतिगत एवं जनता के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा होगी। सरकार और सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष को भी अनावश्यक राजनैतिक बयानबाजियों के बजाय पूरी तैयारी से सदन में आना चाहिए।

उन्होंने सत्र की अवधि कम होने के कांग्रेसी आरोप पूरी तरह उनका राजनैतिक पाखंड बताया। वहीं आईना दिखाते हुए कहा कि सत्र में क्या-क्या काम होगा और कितनी उसकी समय अवधि होगी। यह सब विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति निर्धारित करती है जिसमें नेता प्रतिपक्ष एवं अन्य विपक्षी सदस्य भी शामिल रहते हैं। अब क्योंकि जितना बिजनेस समिति को सदन के लिए वर्तमान सत्र में आवश्यक लगा होगा, उसके आधार पर समयावधि तय की गई है। वहीं निशाना साधा कि समय से अधिक, मंशा का सही होना अतिआवश्यक होता है किसी भी सार्थक चर्चा के लिए।

साथ ही कटाक्ष किया, अभी तक के सभी सत्रों का रिकॉर्ड देखें तो अधिकांश समय कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी विधायक सदन में शोरगुल और हंगामे में व्यस्त रहते हैं। वे सत्ता पक्ष द्वारा शुरू सार्थक चर्चा में न तो भाग लेते हैं और न ही उस बहस को शांति से होने देते हैं। जबकि हमारी तरह विपक्ष भी भली भांति जानता है कि सदन, जनता के मुद्दों को उठाने का सर्वश्रेष्ठ लोकतांत्रिक मंच है। अब चूंकि जनता की समस्या, उनके कल्याण की योजना और प्रदेश का विकास विपक्ष की प्राथमिकता में नहीं रहता है। इसीलिए तय रणनीति के अनुसार सत्र के पहले घंटे से ही वह हंगामा कर सदन की कार्यवाही बाधित करने का प्रयास करते हैं। चूंकि ये सत्र वर्तमान विधानसभा का अंतिम बजट सत्र है, लिहाजा विपक्ष का रुख सदन में क्या रहने वाला है, उनके ये सारे किन्तु परंतु, आपत्ति, उसकी दिशा स्पष्ट कर रहे हैं।

उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि तमाम राजनैतिक हितों को किनारे रख, हम सबको राज्यहित में, सार्थक चर्चा बजट सत्र में करनी चाहिए। सरकार वर्तमान कार्यकाल के इस अंतिम बजट में जनकल्याण की अधिक से अधिक कार्ययोजना संपादित करना चाहती है, जिसमें विपक्ष को भी सहयोग करना चाहिए।

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