देहरादून। राजधानी देहरादून में हाल के दिनों में सामने आई दो अत्यंत चिंताजनक घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। पहली घटना में एक स्टोर के कर्मचारियों के साथ कथित रूप से उत्पीड़न किया गया तथा उनकी नेम प्लेटों पर आपत्तिजनक शब्द लिखे गए। दूसरी ओर, राजधानी की सड़कों पर आम नागरिकों, विशेषकर युवतियों, को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा परेशान किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पुलिस प्रशासन मूकदर्शक क्यों बना हुआ है? यदि किसी संगठन या समूह द्वारा कानून को अपने हाथ में लेकर नागरिकों को भयभीत किया जा रहा है, तो उनके विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी को स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी सरकार कानून के शासन से चलेगी या कुछ संगठनों के दबाव में। यदि आम जनता, व्यापारी, कर्मचारी और महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो यह सरकार की विफलता का प्रमाण है।
दसौनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अक्सर कानून-व्यवस्था पर कड़े रुख की बात करती है। उत्तराखंड सरकार भी स्पष्ट निर्देश जारी करे कि कोई भी संगठन कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता।
दसौनी ने कहा कि कानून-व्यवस्था का दायित्व केवल बयान देने से पूरा नहीं होता। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म, पहचान या विचारधारा के आधार पर भेदभाव न हो और महिलाओं की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।
उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि दोनों घटनाओं की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए और दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा राजधानी देहरादून में महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही मुख्यमंत्री स्पष्ट निर्देश जारी करें कि कोई भी संगठन कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड की शांतिप्रिय जनता भय और अराजकता नहीं, बल्कि सुरक्षा, न्याय और कानून का निष्पक्ष शासन चाहती है। कांग्रेस जनता के अधिकारों और सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाती रहेगी।


