उत्तराखंड उद्यान विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. एचएस बवेजा के कार्यकाल में उद्यान विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितता के कई आरोप लगे। उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई सीबीआइ जांच में घोटालों की कई परतें खुली हैं। अब पांच बड़े अफसरों पर मुकदमा चलाने के लिए सीबीआइ ने सरकार से अनुमति मांगी है।
दून विनर/संवाददाता/देहरादून।
उत्तराखंड में उद्यान घोटाले की सीबीआइ ने 22 महीने की जांच के बाद पूर्व निदेशक डा. एचएस बवेजा सहित 5 बड़े अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी है। उच्च न्यायालय नैनीताल ने उद्यान घोटाले की जांच सीबीआइ को सौंपी थी। उद्यान विभाग उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर फलदार पौधों की खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। आरोप था कि निजी नर्सरियों से मिलीभगत कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। इस घोटाले के खिलाफ आरटीआइ कार्यकर्ता दीपक करगेती की ओर से नैनीताल उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी।
उद्यान विभाग में भ्राटाचार का मामला सामने आने पर सरकार ने तत्कालीन निदेशक डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा को निलंबित कर इसकी जांच के लिए एसआइटी गठित की। इसी दौरान मामला उच्च न्यायालय में गया किन्तु उद्यान विभाग एसआइटी जांच पर अड़ा हुआ था। गौरतलब है कि जनवरी 2024 में उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार की सीबीआइ जांच को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
सामाजिक कार्यकर्ता और याचिकाकर्ता दीपक करगेती ने कहा कि सरकार एसआइटी की जांच में आने वाले बड़े नामों को उजागर नहीं होने देना चाहती क्योंकि इसमें कई बड़े नाम सामने आ सकते है। यही कारण है कि उत्तराखंड सरकार उच्च न्यायालय के सीबीआई जांच के फैसले को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय गई थी।
गौरतलब है कि राज्य सरकार के वकील ने न्यायालय में पैरवी कराते हुए कहा कि राज्य सरकार की एजेंसी एसआइटी इस जांच को गंभीरता से करेगी, एसआइटी को जांच करने दिया जाए। ये बात आई कि उच्च न्यायालय के सीबीआइ जांच के आदेश को लेकर उद्यान विभाग के अधिकारियों की योजना इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने की थी। परन्तु आखिरकार उच्चतम न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद यह मामला सीबीआइ के अधिकार क्षेत्र में है।
16 आरोपियों के खिलाफ हुआ था मुकदमा दर्ज
जून 2024 में उद्यान घोटाले मामले में सीबीआइ ने तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए। तीनों मुकदमों में तत्कालीन उद्यान निदेशक एचएस बावेजा को मुख्य आरोपी बनाया गया। सीबीआइ ने कुल 16 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा किया था। सीबीआइ ने आरोपियों की संपत्ति की जांच की। सीबीआइ ने एक आरोपी तत्कालीन उद्यान निरीक्षक देहरादून नारायण सिंह बिष्ट के घर से साढ़े 13 लाख रुपए नकद और उसकी पत्नी के नाम पर की गई पांच-पांच लाख रुपए की 7 एफडी बरामद की। सीबीआइ ने उद्यान घोटाले में एचएस बावेजा, उद्यान विभाग के अधिकारियों सहित 26 लोगों समेत उत्तर प्रदेश, हिमाचल और जम्मू कश्मीर में 24 विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की।
उद्यान विभाग में हुआ था बड़ा घोटाला
दरअसल, उत्तराखंड उद्यान विभाग में नर्सरी के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया था। ये दावा किया गया कि 15 लाख पौधे लगाने के बहाने 70 करोड़ रुपए खर्च कर दिये गए थे। महगे दामों पर बीज खरीदने का मामला भी सामने आया था। इस मामले को अल्मोड़ा निवासी आरटीआइ कार्यकर्ता दीपक करगेती ने खोला था। उन्होंने सरकार व शासन से इसकी लिखित में शिकायत की थी। 14 सितम्बर, 2022 को सरकार ने उद्यान विभाग में भ्रष्टाचार के जांच के आदेश दिए और जांच रिपोर्ट 15 दिन में प्रस्तुत करने को कहा।
वहीं, सरकार ने 12 जून 2023 को अनियमितताओं के चलते उद्यान विभाग के तत्कालीन निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा को निलंबित कर दिया। बवेजा पर वित्तीय अनियमितताओं के अलावा ये भी आरोप थे कि उन्होंने राज्य में होने वाले फल, मसाले, सब्जी के महोत्सव के दौरान अपनी फाइलों में जरूरत से ज्यादा खर्च दिखाया। सरकार ने मामला खुलने के बाद एसआइटी जांच के आदेश दिए थे। ये भी ध्यान रहे कि उद्यान विभाग में घोटाले के आरोपों के बाबत एक वीडियो उत्तरकाशी के पुरोला सीट के भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल की ओर से भी वायरल हुआ था। इसके बाद यह मामला सियासी गलियारों में उठने लगा।
जनहित याचिका में लगाए कई आरोप
उद्यान विभाग में घोटाले की शिकायतों पर सरकार की ओर से की जा रही जांच से असंतुष्ट सामाजिक कार्यकर्ता दीपक करगेती जनहित याचिका द्वारा मामले को उच्चतम न्यायालय नैनीताल में ले गए। जनहित याचिका में उन्होंने कई आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्यान विभाग में लाखों का घोटाला कर फल और पौधारोपण में गड़बडियां की गई है। विभाग की ओर से एक ही दिन में वर्क जारी कर उसी दिन जम्मू-कश्मीर से पौध लाना दिखाया गया है जिसका पेमेंट भी कर दिया गया। आरोपों में कहा कि शीतकालीन सत्र में निलंबित उद्यान निदेशक ने नकली नर्सरी अनिका ट्रेडर्स को पूरे राज्य में करोड़ों की पौधा खरीद का कार्य देकर बड़ा घोटाला किया।
उद्यान लगाओ उद्यान बचाओ यात्रा से जुड़े किसानों और उत्तरकाशी के किसानों के इस प्रकरण को उठाने पर अनिका ट्रेडर्स के आवंटन को रद्द करने का पत्र जारी कर दिया गया। बावजूद इसके अनिका ट्रेडर्स को पौधे बांटे गए। जनहित याचिका में कहा गया कि नैनीताल में मुख्य उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार सिंह के साथ मिलकर बवेजा ने एक फर्जी आवंटन जम्मू-कश्मीर की एक और नर्सरी बरकत एग्रो फार्म को कर दिया। बरकत एग्रो फार्म को बिल आने से पहले ही भुगतान कर दिया गया। बिलों पर अकाउंटेंट के हस्ताक्षर के बिना ही करोड़ों रुपए ठिकाने लगा दिए।
न्यायालय ने दिया सीबीआइ जांच का आदेश
उच्च न्यायालय ने 23 अक्टूबर, 2023 को उद्यान न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार को सीबीइआइ का पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश में भाजपा के विधायक प्रमोद नैनवाल और उनके भाई सतीश नैनवाल के नाम का भी उल्लेख था।
इसको लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरने की कोशिश की। सीबीआइ की जांच पड़ताल को करीब महीने ही हुआ था कि इस दौरान कई बड़े नाम आने के बाद राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने का निर्णय लिया। किन्तु जनवरी 2024 में उच्चतम न्यायालय उत्तराखंड सरकार की याचिका खारिज कर दी। राज्य सरकार का कहना था कि वह खुद मामले की एसआइटी जांच करवा रही है जिस पर उसको भरोसा है। एसआइटी की जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सरकारी राशि की बंदरबाट की गई। 35 रुपए प्रति पौधे की दर पर मिलने वाले कीवी के पौधे को उद्यान विभाग ने 275 रुपए प्रति पौधे की कीमत पर खरीदा। इसके साथ ही एसआइटी की रिपोर्ट में कई नाम सामने आए।
2021 में हुई थी बवेजा की उत्तराखंड में नियुक्ति
राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद 27 जनवरी, 2021 को उत्तराखंड शासन से उत्तराखंड उद्यान विभाग के निदेशक के पद पर डॉ. हरमिंदर सिंह बवेजा की नियुक्ति के आदेश जारी किए। एचएस बवेजा डॉ वाइएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोनल हिमाचल प्रदेश में वरिष्ठ वैज्ञानिक थे। वे हिमाचल उद्यान विभाग में भी रहे। उत्तराखंड उद्यान विभाग में वे प्रतिनियुक्ति पर आए। ये भी बड़ी विडंबना है कि उत्तराखंड उद्यान विभाग को एचएस बवेजा के रूप में करीब ढाई साल बाद पूर्णकालिक निदेशक मिला था।
जुलाई 2018 में निदेशक पद से आरसी श्रीवास्तव की सेवानिवृत्ति के बाद उद्यान विभाग के निदेशक कामचलाऊ व्यवस्था के तहत बनाए गए। यह जानना भी प्रासंगिक है कि एचएस बवेजा पर हिमाचल में भी घोटाले के मामले चल रहे हैं। मामले में हिमाचल सरकार चार्ज सीट भी सौंप चुकी है।
बवेजा ने कर दिया था नया खेल
दीपक करगेती की जनहित याचिका पर सुनवाई कराते हुए उच्च न्यायालय ने डॉ. एचएस बवेजा को 28 मार्च, 2023 को न्यायालय में पेश होने का आदेश दिया। साथ ही अनिका ट्रेडर्स को होने वाले सभी भुगतानों पर रोक लगा दी। उच्च न्यायालय ने सरकार से जवाब मांगते हुए सचिव उद्यान को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। एचएस बवेजा न्यायालय में पेश हुए। न्यायालय अनिका ट्रेडर्स को होने वाले सभी भुगतानों पर रोक लगा दी। परन्तु इस बीच बवेजा ने उत्तरकाशी और अन्य जिलों में अनिका ट्रेडर्स को भुगतान कर दिया।
12 जून, 2023 को मुख्यमंत्री धामी ने हरमिंदर सिंह बवेजा को उद्यान विभाग के निदेशक पद से निलंबित करने के आदेश दिए। बावेजा पर वित्तीय अनियमितताओं के अलावा ये भी आरोप था कि उन्होंने राज्य में होने वाले फल, मसाले, सब्जी के महोत्सवों के दौरान अपनी फाइलों में जरूरत से ज्यादा खर्चा दिखाया। डॉ. एचएस बवेजा के निलंबन के कुछ दिनों बाद जल्दी ही उद्यान विभाग में घोटाले के बावत उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई भी होनी थी। हैरत की बात है कि उद्यान विभाग की ओर से दागी नर्सरी को फिर से फल पौध आवंटन का काम दिया जा रहा था। इस पर सवाल उठने के बाद विभाग ने फरवरी 2025 में आदेश रद्द कर दिया।
विधानसभा में उठा था उद्यान घोटाला
फरवरी 2025 में हुए विधानसभा सत्र में भी सदन में उद्यान घोटाले का मामला उठा था। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य में अवैध खनन के साथ ही उद्यान विभाग में महाघोटाला का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उद्यान घोटाला सीबीआइ जांच में भी साबित हुआ। इसके अलावा 2024 में सीबीआइ द्वारा उद्यान घोटाले में अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद कांग्रेस का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला था।
जून 2024 में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एस्ले हाल चौक पर उद्यान मंत्री का पुतला दहन करके जमकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष जसविंदर गोगी ने आरोप लगाया कि उद्यान घोटाले में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ नेता भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। कांग्रेस का कहना है कि सीबीआइ यदि जांच का दायरा और बढ़ाती है तो राज्य सरकार के मंत्री और जनप्रतिनिधि इस घोटाले में लिप्त पाए जाएंगे। कांग्रेस ने कहा कि नैतिकता के आधार पर उद्यान मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।


