राहुल से संवाद मे कांग्रेस शासन के घोटालों पर भी सवाल पूछे छात्र: भट्ट

राहुल से संवाद मे कांग्रेस शासन के घोटालों पर भी सवाल पूछे छात्र: भट्ट

* धामी सरकार ने कांग्रेस शासन में पनपी भ्रष्ट नियुक्ति प्रक्रिया को किया साफ, दी रिकॉर्ड नौकरियां: भट्ट

* कांग्रेस ने डाली राज्य की परीक्षा मे घोटालों की नींव

देहरादून। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने छात्रों की गूंज सुनने के लिए देहरादून आने वाले छात्रों से संवाद के दौरान राहुल गांधी से कांग्रेस शासन मे हुए भर्ती घोटालों पर जवाब पूछने को कहा है।

भट्ट ने पूछा कि क्या देवभूमि को भी भर्ती घोटालों का एपिक सेंटर बनाने वाली कांग्रेस नहीं थी? दारोगा, पटवारी, बीडीओ, सिडकुल आयुर्वेद, टेक्नीकल यूनिवर्सिटी भर्तियां में लूट किसकी सरकार में हुई? राहुल को अपनी सरकारों में नकल के शोर की गूंज कभी सुनाई नहीं दी जबकि भाजपा सरकार ने प्रदेश के युवाओं के भविष्य से नकल और घोटालों के शोर को हमेशा के लिए दूर कर का ऐतिहासिक काम किया है।

मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कई गंभीर सवाल राहुल गांधी से उनके दौरे को लेकर पूछे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें देहरादून आने से पहले उनकी सरकारों द्वारा उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य पर डाले डाके की गूंज कभी सुनाई दी। यहां आकर झूठा ज्ञान देने से पहले उन्हें ये कड़वा सच भी स्वीकार करना चाहिए कि उत्तराखंड को भर्ती घोटालों का एपिक सेंटर कांग्रेस सरकार ने बनाया था? नियुक्ति प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार और घोटाले की जड़ें कांग्रेस शासनकाल में गहरी जमाई गई थी। एन.डी. तिवारी सरकार 2002 से 2007 के दौरान दरोगा भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे। मामला इतना गंभीर था कि जांच CBI तक पहुंची। इसी दौरान पटवारी भर्ती में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप लगे। एक ही परिवार के कई सदस्यों के चयन और लेन-देन के आरोपों के बाद भर्ती निरस्त करनी पड़ी थी।

इतना ही नहीं हरीश रावत सरकार में 2014 से 2017 के दौरान 2016 की UKSSSC VPDO भर्ती परीक्षा विवादों में रही। बाद की जिसकी जांच में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हुई। वहीं सिडकुल भर्ती विवाद में पक्षपात और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे और SIT जांच तक करनी पड़ी। टेक्निकल यूनिवर्सिटी और आयुर्वेद विश्वविद्यालय की भर्तियां भी लगातार विवादों और अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रहीं। यह बात शीशे की तरह साफ है कि जिस दौर में कांग्रेस सत्ता में थी, उस समय भर्ती प्रक्रियाओं पर लगातार सवाल उठे, जांच एजेंसियां लगीं, भर्तियां रद्द हुईं और युवाओं का विश्वास भर्ती प्रक्रियाओं से उठता चला गया।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में UKSSSC भर्ती घोटाले का मामला सामने आया, तो उसे दबाया नहीं गया। उन्होंने इसके समूल नाश के लिए देश का सबसे कठोर नकल-विरोधी कानून बनाया और लागू किया। जिसके चलते 100 से अधिक नकल माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसी क्रम में भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए। अंतत परिणाम ये रहा कि पिछले चार वर्षों में 34,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से मिली हैं।

भट्ट ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा की सरकारों में यही फर्क है कि कांग्रेस के दौर में घोटाले होते थे, कार्रवाई नहीं होती थी। भाजपा सरकार में गड़बड़ी सामने आई तो कानून बना, माफिया जेल गए, जांच हुई, गिरफ्तारियां हुईं और व्यवस्था बदली गई। उन्होंने प्रश्न उठाया कि युवाओं के भविष्य पर राजनीति करने से पहले यह भी बताइए कि जिन भर्ती घोटालों की नींव कांग्रेस के शासनकाल में पड़ी, उनके लिए जवाबदेह कौन था?

उन्होंने भरोसे के साथ कहा कि उत्तराखंड का युवा सब याद रखता है और उसे भाषण नहीं, रिकॉर्ड दिखाई देता है। एक तरफ भर्ती घोटालों का कांग्रेसी इतिहास है, दूसरी तरफ कठोर कानून, माफियाओं पर कार्रवाई, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और हजारों युवाओं को योग्यता के आधार पर मिली सरकारी नौकरियां हैं। कांग्रेस ने राजनीति की और वर्षों तक व्यवस्था को सड़ने दिया। जबकि हमारी सरकार ने उसी सड़ी व्यवस्था को साफ किया और कानून को सख्ती से लागू किया। जिसका परिणाम है कि प्रदेश के युवाओं का आज भर्ती प्रक्रिया में विश्वास पुनः बहाल हुआ है और वो कांग्रेस के ऐसे राजनैतिक तमाशे पर विश्वास नहीं करेगा।

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