बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में सामने आए भ्रष्टाचार और चोरी की घटना पर कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में सामने आए भ्रष्टाचार और चोरी की घटना पर कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने बदरीनाथ धाम में दानराशि की कथित चोरी के मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली और सरकार की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि जिस व्यक्ति प्रमोद नौटियाल को इस मामले में पकड़ा गया है, वह पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष, पूर्व सूचना आयुक्त तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता विनोद नौटियाल का सगा भतीजा है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार प्रमोद नौटियाल को विनोद नौटियाल के बीकेटीसी अध्यक्ष रहते समिति से जोड़ा गया था तथा वर्ष 2010 में उसके नियमितीकरण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया, जिसे वर्ष 2014 में स्वीकृति मिली। यह मात्र एक सहयोग ही था कि प्रमोद नौटियाल के नियति कारण की स्वीकृति जब तक शासन से आई उस समय बीकेटीसी के अध्यक्ष के तौर पर गणेश गोदियाल नियुक्त हो चुके थे।

उन्होंने कहा कि यह तथ्य स्वयं स्पष्ट करता है कि किसी कर्मचारी का समिति में होना और उसके आचरण के बीच अंतर होता है। कांग्रेस के कार्यकाल में भी प्रमोद नौटियाल समिति का हिस्सा था, लेकिन उस समय इस प्रकार की दानराशि की चोरी या नोटों की गड्डियों के गायब होने जैसी घटनाएं सामने नहीं आईं। इससे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि वही अधिकारी और कर्मचारी आज किस माहौल में इस प्रकार की घटनाओं में संलिप्त पाए जा रहे हैं। आखिर ऐसा कौन-सा वातावरण बन गया है जिसमें भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है?

गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि आज बीकेटीसी के भीतर लाखों रुपये के खर्च पर भाजपा के वीआईपी नेताओं को विशेष दर्शन कराए जाने के आरोप सामने आते हैं, दानराशि से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं की खबरें आती हैं और सीसीटीवी कैमरों में नोटों की गड्डियां गायब होती दिखाई देती हैं। इसके बावजूद सरकार अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय विपक्ष पर सवाल उठाने का प्रयास कर रही है, जो वास्तविक मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उसी समय मुख्यमंत्री को आगाह किया था, जब बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति की जा रही थी। कांग्रेस का स्पष्ट मत था कि इस अत्यंत आस्था और विश्वास से जुड़े पद पर केवल एक प्रभावशाली, निष्पक्ष, निष्ठावान और निष्कलंक छवि वाले व्यक्ति की नियुक्ति होनी चाहिए। दुर्भाग्यवश उस सलाह की अनदेखी की गई और आज समिति लगातार विवादों और गंभीर आरोपों के घेरे में है।

गरिमा मेहरा दसौनी ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो तथा यह भी स्पष्ट किया जाए कि मंदिर की दानराशि की सुरक्षा और समिति की जवाबदेही सुनिश्चित करने में आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। देवभूमि की आस्था से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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