देहरादून। भाजपा ने कांग्रेस की दिल्ली रैली को सिक्ख दंगों पर ज़ख्मों पर नमक छिड़कने, व्यापारियों का नुकसान पहुंचाने और अराजक मंशा वालों तत्वों का जमावड़ा ठहराया है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि रमजान पर विदेशों में युद्ध बंद कराने की वकालत वाले हिन्दू त्यौहारों पर देश को आर्थिक चोट पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने हरक सिंह रावत के संबंधियों पर जमीन कब्जाने की शिकायत पर स्पष्ट किया कि सबको जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। वहीं जेनी प्रकरण को लेकर आरोप प्रत्यारोपों पर व्यंग किया कि कालीन के नीचे दबा सच तो सामने आना ही चाहिए।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कांग्रेस एवं विपक्ष की रैली को त्यौहारी सीजन में अराजकता फैलाने और अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कटाक्ष किया कि जो विगत 15 साल से जनता को अपनी बात समझाने में विफल रहे हों और संसद में हंगामा करने को अपना अधिकार समझते हों उनसे अधिक उम्मीद नही की जा सकती है। भ्रम, अफवाह को ही अपनी नीति का अहम हिस्सा बनाने तथा चुनाव आयोग एवं सुप्रीम कोर्ट में पक्ष न रखने के बावजूद अपने झूठ पर अडिग हैं। उनकी रामलीला मैदान की वोट बचाओ रैली एक दूसरे को बचाने का दिलासा देने की असफल कोशिश है।
भट्ट ने सीधे आरोप लगाया कि यह रैली कहीं न कहीं 1984 के सिक्ख दंगों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने की कोशिश है। क्योंकि जिस कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने 1 नवंबर 1984 से दिल्ली और देश में सिक्खों का नरसंहार किया वही इस रैली की मुख्य आयोजक बनी। इसी तरह इनकी कोशिश थी दिल्ली से संचालित उत्तर भारत के थोक बाजार को बाधित करना ताकि त्यौहारी सीजन में देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाई जाये। वहीं आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्ष को ऐसे कार्यक्रमों को करते समय जरा भी हिन्दू त्यौहारों के प्रभावित होने की चिंता नहीं रहती है। अन्यथा देश ने देखा है कि किस तरह रमजान पर खाड़ी से लेकर पाक अफगान आदि दुनिया भर के युद्धों को रोकने की हमारे देश में वकालत की जाती थी।
उन्होंने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के संबंधियों पर लगे जमीन कब्जाने के आरोपों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण पर किसी ने शिकायत की और हर उस व्यक्ति को, जो प्रताड़ित होता है, तो उसको अपनी बात रखने का अधिकार है, रिपोर्ट करने का अधिकार है। मुकदमा दर्ज करना प्रशासनिक उत्तरदायित्व है। ऐसे में उस पर जो भी जांच होगी वह शीघ्र सबके सम्मुख आएगी। लेकिन प्रत्यक्ष रूप से इतने बड़े नेता का नाम अगर आरोपी में आता है, तो यह वास्तव में अपने आप में एक चिंता का विषय है। और अगर इसमें तथ्य नहीं है तो हरक सिंह रावत को डरने की क्या जरूरत है।
उन्होंने जेनी प्रकरण को लेकर सामने आई हरक सिंह रावत की सफाइयों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये पूरा प्रकरण कांग्रेस के शासन काल में हुआ। जो कुछ हुआ, वह तथ्य अभी तक छुपा हुआ क्यों है? वह विषय निकल कर आना चाहिए, हम आरोप नहीं लगा रहे हैं। लेकिन अगर उस समय जैनी ने आरोप लगाए हैं, तो उनकी तथ्यात्मक कुछ बातें होंगी जो सार्वजनिक होनी चाहिए।



