* 45 पर्यावरण प्रेमियों को मिला ‘गौरादेवी वृक्ष प्रहरी सम्मान-2026’
* गौरादेवी का संघर्ष बना प्रकृति संरक्षण का वैश्विक प्रेरणास्रोत- ग्रीनमैन विजयपाल बघेल
ऋषिकेश/देहरादून। रविवार को चिपको आंदोलन की प्रणेता एवं महान पर्यावरण संरक्षक माता गौरादेवी की 101वीं जन्म जयंती के अवसर पर भारतीय वृक्ष न्यास (Tree Trust of India) द्वारा सात मोड़ क्षेत्र में आयोजित भव्य ‘वृक्षांजलि समारोह’ श्रद्धा, उत्साह और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ।

समारोह का शुभारंभ अतिथियों एवं पर्यावरण प्रेमियों द्वारा पौधारोपण के साथ किया गया। सभी ने पौधे लगाकर उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया। इसके पश्चात माता गौरा देवी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके ऐतिहासिक चिपको आंदोलन, प्रकृति प्रेम और वन संरक्षण के अतुलनीय योगदान को नमन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी जगदीश लाल पाहवा ने की तथा संचालन कार्यक्रम संयोजक प्रमोद शर्मा ने किया। भारतीय वृक्ष न्यास के अध्यक्ष एवं हरितऋषि डॉ. विजयपाल बघेल (Green Man of India) के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह में पर्यावरण संरक्षण, वृक्ष संवर्धन और जनजागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं।
45 पर्यावरण प्रेमियों को मिला सम्मान
समारोह का विशेष आकर्षण पर्यावरण संरक्षण, वृक्ष संवर्धन एवं प्रकृति के प्रति समर्पित कार्य करने वाले 45 पर्यावरण प्रेमियों को ‘गौरादेवी वृक्ष प्रहरी सम्मान-2026’ प्रदान कर सम्मानित करना रहा। सम्मानित व्यक्तियों को माता गौरा देवी के पर्यावरण संरक्षण संबंधी विचारों को आगे बढ़ाने तथा समाज में हरित चेतना जागृत करने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने माता गौरादेवी के जीवन, चिपको आंदोलन और वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपने विचार रखे। हरितऋषि डॉ. विजयपाल बघेल ने कहा कि माता गौरादेवी केवल चिपको आंदोलन की प्रणेता नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति भारतीय समाज की संवेदनशीलता और सामूहिक शक्ति की प्रतीक हैं। उन्होंने पेड़ों को बचाने के लिए जो ऐतिहासिक संघर्ष किया, वह आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है। पौधारोपण के साथ वृक्षों का संरक्षण ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
वरिष्ठ समाजसेवी एवं कार्यक्रम अध्यक्ष जगदीश लाल पाहवा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। ऐसे आयोजन सामाजिक चेतना को मजबूत करते हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता हिमांशु अरोरा ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। युवाओं को वृक्ष संरक्षण के अभियानों से जोड़ना होगा।
पर्यावरण कार्यकर्ता जया सिंह ने कहा कि महिलाओं की पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गौरादेवी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं प्रकृति की रक्षा के लिए बड़े सामाजिक परिवर्तन का नेतृत्व कर सकती हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ता इरा चौहान ने कहा कि बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति प्रेम तथा संवेदनशीलता विकसित करना जरूरी है। पर्यावरण शिक्षा को व्यवहार और जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। श्री विनोद मित्तल ने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक है, जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पौधे लगाने के साथ उन्हें बचाने की संस्कृति विकसित करनी होगी।
ओ.पी. सिंह ने कहा कि वन, जल और स्वच्छ पर्यावरण मानव जीवन के आधार हैं। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य है। एस.एस. राणा ने कहा कि वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जनसहयोग से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रयास स्थायी और प्रभावी बन सकते हैं। महेश धीमान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल आयोजनों तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए। स्वच्छता, जल संरक्षण और वृक्षों की सुरक्षा प्रत्येक व्यक्ति की आदत बननी चाहिए।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर वन क्षेत्राधिकारी बड़कोट गणेश उनियाल ने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों, पर्यावरण प्रेमियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनसहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह में उपस्थित लोगों ने माता गौरा देवी के आदर्शों पर चलते हुए वनों, वृक्षों, नदियों और जैव विविधता के संरक्षण का संकल्प लिया। हरितऋषि डॉ. विजयपाल बघेल ने कहा कि भारतीय वृक्ष न्यास का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि प्रत्येक पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षित करना तथा समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करना है। कार्यक्रम में नितिन मलिक, ओमिनी, शिल्पी, डॉ बलविंदर सिंह, माया अवस्थी आदि के साथ प्रकृति प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, छात्रसंघ के पदाधिकारी, वरिष्ठ नागरिक तथा वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी शामिल हुए।



