बाजपुर/देहरादून। हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश की डिजिटल सुरक्षा, व्यक्तिगत निजता और पारिवारिक सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। कांग्रेस विधायक द्वारा अपने और अपने परिवार के डिजिटल उपकरणों की हैकिंग, ट्रैकिंग और उनके दुरुपयोग की आशंका जताए जाने के बाद अब नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस पूरे प्रकरण की समयबद्ध और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
एआई और फोन टैपिंग के ज़रिए बड़ी साज़िश का अंदेशा
विधायक सुमित हृदयेश ने अत्यंत गंभीर आशंका व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया खातों, अन्य डिजिटल उपकरणों और यहाँ तक कि उनके वाहन की गोपनीय जानकारियों तक अनधिकृत रूप से पहुँच बनाई जा रही है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआई और आधुनिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल करके उनके खिलाफ भ्रामक व कूटरचित (डीपफेक) ऑडियो-वीडियो सामग्री तैयार की जा रही है, जिसे सार्वजनिक रूप से प्रसारित कर उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने की साज़िश रची जा रही है।
इस संवेदनशील विषय को लेकर पूर्व में भी पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। इसके बावजूद, अब तक की गई कार्रवाई, जाँच की वर्तमान स्थिति और निष्कर्षों के बारे में शिकायतकर्ता या विधायक को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। मामले में हो रहे अनावश्यक विलंब को देखते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व में दी गई लिखित शिकायत पर अब तक हुई प्रगति की तत्काल समीक्षा की जाए और उसकी रिपोर्ट विधायक को सौंपी जाए। डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी जाँच: साइबर विशेषज्ञों की मदद से विधायक और उनके परिवार के डिजिटल उपकरणों का तकनीकी आकलन हो। यदि डेटा चोरी या एआई द्वारा फर्जी सामग्री बनाने के साक्ष्य मिलते हैं, तो दोषियों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए।
मामले से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि उनके साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।पारिवारिक निजता एवं सुरक्षा: विधायक और उनके परिजनों की सुरक्षा चिंताओं का आकलन कर उन्हें उचित सुरक्षा घेरा प्रदान किया जाए।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी जनप्रतिनिधि की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निजता और प्रतिष्ठा की रक्षा करना कानून-व्यवस्था का मूल दायित्व है। जनप्रतिनिधियों से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में बिना किसी पूर्वधारणा के, पूरी पारदर्शिता के साथ समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए ताकि जनता और जनप्रतिनिधियों का व्यवस्था पर विश्वास बना रहे। शासन-प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल उच्चस्तरीय निर्देश जारी करेंगे।



