* SIR को राजनीतिक मुद्दा बनाकर तुष्टिकरण की राजनीति कर रही कांग्रेस
* निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता से घबरा रही कांग्रेस, दोहरी मतदाता प्रविष्टियों पर चुप्पी से उठे सवाल
* दोहरे वोटरों की जांच से कांग्रेस को आपत्ति क्यों? : तरुण बंसल
देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर विशेष वर्ग की सहानुभूति और वोट बैंक की राजनीति के लिए SIR जैसी महत्वपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल ने कहा कि कांग्रेस द्वारा भाजपा पर फर्जी आपत्तियां लगवाने का आरोप पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा कि SIR के तहत प्राप्त दावों और आपत्तियों का परीक्षण निर्वाचन अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जा रहा है और अंतिम निर्णय निर्वाचन तंत्र के स्तर पर ही होता है।
बंसल ने कहा कि SIR कोई राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की संवैधानिक निर्वाचन प्रक्रिया है। इसमें BLO, ERO और अन्य निर्वाचन अधिकारी निर्धारित नियमों के तहत मतदाताओं के विवरण का सत्यापन करते हैं। साथ ही राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट भी प्रक्रिया में भाग लेते हैं। निर्वाचन आयोग ने भी SIR को सभी हितधारक की भागीदारी वाली प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रही है।
बंसल ने कहा कि कांग्रेस को यदि किसी आपत्ति पर संदेह है तो वह उसका तथ्यात्मक परीक्षण कराने के लिए निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करे। लेकिन कांग्रेस हर निर्वाचन प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। भाजपा पर फर्जी आपत्तियां लगवाने का आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि उसने स्वयं किन-किन नामों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराईं और उन आपत्तियों के पीछे उपलब्ध दस्तावेज और तथ्य क्या हैं।
उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि उत्तराखंड की मतदाता सूची में ऐसे नाम कैसे मौजूद हैं, जो उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों की मतदाता सूची में भी दर्ज पाए जा रहे हैं? यदि किसी व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज है, तो उसका सत्यापन और आवश्यकतानुसार सुधार निर्वाचन प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार सामान्य मतदाता का पंजीकरण उस क्षेत्र की मतदाता सूची में होना चाहिए जहां वह सामान्य निवासी है।
बंसल ने कहा कि हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, देहरादून और पौड़ी गढ़वाल सहित कई जिलों में सत्यापन के दौरान ऐसे मामलों के सामने आने की बात कही जा रही है, जिनमें एक ही व्यक्ति की प्रविष्टियां अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूचियों में दिखाई दे रही हैं। ऐसे मामलों का राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और निर्वाचन नियमों के आधार पर परीक्षण होना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में निष्पक्ष और स्वच्छ मतदाता सूची चाहती है तो वह दोहरी प्रविष्टियों और संदिग्ध रिकॉर्ड के मामलों पर भी उतनी ही मुखर क्यों नहीं है? क्या कांग्रेस को केवल उन्हीं आपत्तियों पर राजनीति करनी है, जिनसे उसका वोट बैंक प्रभावित होने का डर है? यदि मतदाता सूची में कहीं अनियमितता है तो उसे सामने लाना और निर्वाचन अधिकारियों के संज्ञान में देना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
बंसल ने कहा कि निर्वाचन आयोग की व्यवस्था में Form-7 के माध्यम से किसी नाम को हटाने का दावा/अनुरोध किया जा सकता है, जबकि Form-8 के माध्यम से प्रविष्टि में सुधार की व्यवस्था है। यानी मतदाता सूची में गलत, स्थानांतरित, मृत या अन्य कारणों से अपात्र प्रविष्टियों के सुधार के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पहले से मौजूद है।
उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि एक व्यक्ति, एक वैध मतदाता प्रविष्टि और पारदर्शी मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है। मतदाता सूची की शुद्धता किसी राजनीतिक दल के हित का विषय नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।
बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस निर्वाचन अधिकारियों पर अनैतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है और प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसे SIR की निष्पक्ष प्रक्रिया से आपत्ति है या उन प्रविष्टियों की जांच से, जिन पर निर्वाचन अधिकारियों को संदेह दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और बिहार सहित अन्य राज्यों में भी कांग्रेस ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे गंभीर विषयों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया। कांग्रेस को यह समझना होगा कि वोट बैंक की राजनीति और मतदाता सूची की शुचिता एक साथ नहीं चल सकती।
भाजपा महामंत्री ने कहा कि भाजपा निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका और मतदाता सूची की पारदर्शिता का सम्मान करती है। कांग्रेस को भी राजनीतिक सुविधा के अनुसार निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय तथ्यों, दस्तावेजों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य किसी वर्ग को हटाना या जोड़ना नहीं, बल्कि पात्र मतदाताओं की सही पहचान और मतदाता सूची को अधिक शुद्ध एवं विश्वसनीय बनाना है। इसलिए कांग्रेस को भ्रम और तुष्टिकरण की राजनीति छोड़कर यह बताना चाहिए कि दोहरी मतदाता प्रविष्टियों और संदिग्ध नामों के सत्यापन में उसे आखिर परेशानी क्या है?


