* समय पर जांच, नियमित उपचार और जनभागीदारी को बनाया अभियान का आधार
देहरादून। टीबी मुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने और देश के युवाओं को क्षय रोग उन्मूलन अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ने की दिशा में JOSH (Joint Squad for Health) कार्यक्रम की शुरुआत की गई। कार्यक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।

इस अवसर पर उत्तराखंड ने भी राष्ट्रीय कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड की ओर से कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं की ऊर्जा, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ना है, ताकि बीमारी के प्रति जागरूकता को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सके। इसके माध्यम से युवाओं को टीबी के लक्षणों की पहचान करने, संभावित मरीजों को समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करने और उपचार को नियमित रूप से पूरा करने के लिए लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी से जोड़ा जाएगा।

टीबी केवल एक स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं है, बल्कि इसके साथ सामाजिक भ्रांतियां और कलंक भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में युवाओं को अभियान से जोड़कर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने, गलत धारणाओं को दूर करने और टीबी मरीजों के प्रति सकारात्मक सामाजिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग ने की सक्रिय सहभागिता
राष्ट्रीय स्तर पर JOSH कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की गई। इस अवसर पर ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार एवं अनुश्रवण परिषद, उत्तराखंड सरकार के उपाध्यक्ष नितिन गौतम, मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखंड डॉ. संदीप तिवारी, निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. शिखा जंगपांगी, राज्य टीबी अधिकारी डॉ. महेश खेतान, संयुक्त निदेशक एनसीसी, संयुक्त निदेशक माय भारत सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान टीबी उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे प्रयासों, युवाओं की भूमिका और जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी बीमारी के उन्मूलन के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं होते, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी होती है। इसी सोच के साथ JOSH कार्यक्रम के जरिए युवाओं को टीबी के खिलाफ जागरूकता की मुहिम से जोड़ने की पहल की गई है।
लक्षण पहचानने से लेकर उपचार तक युवाओं की भूमिका
JOSH कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को टीबी के सामान्य लक्षणों के बारे में जानकारी दी जाएगी। लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख में कमी और कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। युवाओं को यह संदेश पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा कि संभावित टीबी मरीज को बीमारी छिपाने के बजाय तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करानी चाहिए। समय पर बीमारी की पहचान होने से उपचार शुरू किया जा सकता है और संक्रमण को फैलने से रोकने में भी मदद मिलती है। इसके साथ ही टीबी उपचार के दौरान दवाओं का नियमित सेवन बेहद महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि मरीज उपचार को बीच में न छोड़ें और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरा उपचार लें। युवाओं की भूमिका मरीजों और उनके परिवारों को इस संबंध में जागरूक करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
भ्रांतियों और सामाजिक कलंक को दूर करने पर जोर
टीबी के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ी चुनौतियों में बीमारी से जुड़ी भ्रांतियां और सामाजिक कलंक भी शामिल हैं। कई बार जानकारी के अभाव में लोग टीबी को लेकर भय या गलत धारणाओं का शिकार हो जाते हैं। इसके कारण मरीज बीमारी छिपाने की कोशिश कर सकता है और समय पर जांच एवं उपचार नहीं करा पाता। JOSH कार्यक्रम युवाओं को इस सामाजिक चुनौती से निपटने के लिए भी सक्रिय करेगा। युवा अपने आसपास के लोगों को यह संदेश दे सकेंगे कि टीबी एक उपचार योग्य बीमारी है और समय पर जांच तथा पूरा उपचार कराने से इससे स्वस्थ हुआ जा सकता है। युवाओं के माध्यम से स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सामाजिक संगठनों और समुदायों तक टीबी से संबंधित सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल भी जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
जनभागीदारी से मजबूत होगा टीबी उन्मूलन अभियान
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए समय पर जांच, नियमित उपचार और जनभागीदारी तीन महत्वपूर्ण आधार हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही समुदाय को जागरूक करना भी जरूरी है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और भौगोलिक रूप से विविध राज्य में दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता गतिविधियों की पहुंच सुनिश्चित करना विशेष महत्व रखता है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवी समूहों की भागीदारी टीबी से संबंधित संदेश को घर-घर तक पहुंचाने में प्रभावी साबित हो सकती है। JOSH कार्यक्रम इसी दिशा में युवाओं को स्वास्थ्य जागरूकता के सक्रिय दूत के रूप में तैयार करने की पहल है। युवाओं की भागीदारी से टीबी के संभावित मरीजों की पहचान, समय पर जांच के लिए प्रेरित करने और उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
टीबी हारेगा, भारत जीतेगा
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक संकल्प लिया। प्रतिभागियों ने समय पर जांच कराने, नियमित उपचार को बढ़ावा देने और टीबी से जुड़ी भ्रांतियों तथा सामाजिक भेदभाव को दूर करने में सहयोग देने की शपथ ली। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि टीबी मुक्त उत्तराखंड और टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए आम नागरिक, युवा, स्वास्थ्यकर्मी, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधियों की संयुक्त भागीदारी जरूरी है। JOSH कार्यक्रम इसी सामूहिक भागीदारी को मजबूत करने का माध्यम बनेगा। युवाओं की ऊर्जा और जागरूकता को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़कर बीमारी के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने, समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करने तथा सामाजिक कलंक को खत्म करने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में इस संदेश के साथ टीबी मुक्त उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प लिया गया कि “टीबी हारेगा-भारत जीतेगा, युवाओं के JOSH से बनेगा टीबी मुक्त उत्तराखंड।



