* लोकतंत्र बचाने का ढोंग वाली कांग्रेस में ही यात्रा संवाद की आजादी नहीं : भाजपा*
* कांग्रेस में आतंरिक लोकतंत्र समाप्त, हरदा पर पाबंदी तो सामान्य कार्यकर्ता का क्या हाल होगा : भट्ट
देहरादून। भाजपा ने कांग्रेसी गुटबाजी के घटनाक्रम पर तंज कसा कि लोकतंत्र बचाने का ढोंग करने वाली पार्टी में ही अंतरिक लोकतंत्र नहीं बचा है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने निशाना साधा कि कांग्रेस में हरीश रावत जैसे शीर्ष नेताओं को भी यात्रा निकालने की आजादी नहीं है तो सामान्य कार्यकर्ता का क्या हाल होगा। वहीं सुझाव दिया कि हरदा का कांग्रेस में कोई सम्मान नहीं बचा, लिहाजा उन्हें अब राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए।
पार्टी मुख्यालय में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस के विचारों कन्फ्यूजन और संगठन में गुटबाजी कूट कूट कर भरी है। ताजा घटनाक्रम में जो सामने आ रहा कि कांग्रेस की प्रभारी ने अपनी पार्टी के शीर्ष नेता हरीश रावत को यात्रा करने पर लगाम लगा दिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रभारी के पत्र ने पुनः साबित कर दिया है कि कांग्रेस गुटबाजी से त्रस्त और लोकतंत्र का अभाव है। कांग्रेस के अंदर अनेकों खेमे, जिसमें आज की तारीख में दो खेमे प्रमुखत दिखाई दे रहे हैं। एक गणेश गोदियाल का खेमा है, तो दूसरा हरीश रावत का खेमा। जो चुनाव आते-आते और भी कई खेमों में दिखाई देंगे। अब देखना यह है कि उनकी प्रभारी गुटों पर कितना कंट्रोल कर सकती हैं, जो उनका आंतरिक मामला है।
उन्होंने सहानुभूति जताते हुए कहा कि हरीश रावत का कांग्रेस में जो सम्मान होना चाहिए था, वह अब दिख नहीं रहा है। इसलिए अब प्रभारी भी दबाव बना रहे हैं और प्रभारी तभी दबाव बनाते हैं जब राज्य का जो संगठन होता है, वह विरोध करता है। लिहाजा हरीश रावत को समझ आ जाना चाहिए कि अब कांग्रेस में उनका विरोध ही रहने वाला है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोई बहुत ज्यादा हरदा का सम्मान कांग्रेस में बचा नहीं है। अच्छा हो कि इस उम्र में वह राजनीति से संन्यास ले लें।
वहीं उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को आईना दिखाते हुए कहा कि जो अपने ही बड़े बड़े नेताओं को बोलने और यात्रा संवाद करने की इजाजत नहीं देते, वो लोकतंत्र बचाने का दावा करते हैं। जनता भी देख रही है कि संविधान की किताब हाथ में रखकर लोकतंत्र की दुहाई देने वालों की असलियत। 2027 के चुनाव के बाद यही कांग्रेस ईवीएम, एसआईआर और चुनाव आयोग पर हार का ठीकरा फोड़ेगी।



