* चुनावों में नाकाम राहुल कांग्रेस, संवैधानिक संस्थाओं को ही बदनाम करने में जुटी : भट्ट
देहरादून। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और एसआईआर को लेकर राहुल कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह ‘मनगढ़ंत झूठ’ और भ्रम फैलाने की एक और साजिश करार दिया हैं। उन्होंने इसे राजनैतिक पाखंड बताते हुए कहा कि एसआईआर के बाद केरल में जीतने वाली कांग्रेस को देशभर में भाजपा की जीत स्वीकार नहीं है। हार की हताशा में वे तमाम संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के देशविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों द्वारा पूछे सवालों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को अपने निशाने पर लिया। जोरदार हमला करते हुए कहा कि लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करने के बजाय कांग्रेस और उसके नेता जनादेश का अनादर करने की अपनी पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जान चुके हैं कि संवैधानिक व्यवस्था एवं लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में वे अब जनता का विश्वास पुनः हासिल नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि वे नाच न आए, आँगन टेडा के मुहावरे को चरितार्थ करते हुए पूरे जनतांत्रिक सिस्टम पर भ्रम एवं झूठ फैलाकर, उन्हें ध्वस्त करना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत वे संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल हमला करते हैं। कांग्रेस जब भी चुनाव हारती है, तब-तब वह चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रचती है। अपनी जमीनी विफलता से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के झूठे और बेबुनियाद बयान दिए जाते हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग के अंदरूनी प्रक्रिया पर झूठ फैलाने के लिए राहुल एवं कांग्रेस नेताओं की कड़े शब्दों में निंदा की है। चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा प्रत्येक फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिया गया है।
इसमें किसी भी तरह की अनियमिता या पक्षपात का सवाल ही नहीं उठता। ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 21(3) के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण आयोजित करने का पूरा कानूनी अधिकार प्राप्त है। आयोग अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन कानून के दायरे में रहकर ही कर रहा है, सुप्रीम कोर्ट भी इसे स्वीकार कर चुका है।
वहीं कांग्रेस के दोहरे चरित्र को बेनकाब करते हुए कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस को जीत हासिल होती है, वहां उसे न तो चुनाव आयोग पर शक होता है और न ही चुनाव प्रक्रिया पर और न ही एसआईआर पर। इसे केरल, तमिलनाडु, बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में विपक्ष की जीत और भाजपा की हार के बाद सामने आई कांग्रेसी प्रतिक्रिया से समझा जा सकता है। लेकिन जहां जहां जनता कांग्रेस को नकार देती है, वहां आयोग पर मनगढ़ंत आरोप मढ़ना कांग्रेस की राजनीतिक फितरत बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को देश की संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाना बंद कर जनता से इस झूठे प्रचार के लिए माफी मांगनी चाहिए।

